
कुल्लू। जिला कुल्लू में कुष्ठ रोगियों की संख्या में कमी आई है। इस वर्ष मरीजों की संख्या 12 ही रह गई। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में 12 सालों में 241 लोगों को कुष्ठ रोग मुक्त किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से लेकर अब तक 250 से अधिक लोग कुष्ठ रोग से ग्रसित पाए गए हैं। इनमें से 241 लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने रोग से मुक्ति दिलाई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से अब तक एमबी के 195 और पीबी के 46 कुष्ठ रोगियों को ठीक किया है। विभाग के पास कुष्ठ रोगियों के आंकड़ों में अधिकतर रोगी बाहरी राज्यों के पाए गए हैं। वर्तमान में भी विभाग के पास 12 कुष्ठ रोगी उपचाराधीन हैं। इसमें जिला के सिर्फ चार लोग हैं तथा अन्य बाहरी राज्यों से संबंध रखते हैं।
कुष्ठ रोग विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग में आदमी की चमड़ी और कोशिकाओं की निष्क्रियता बढ़ती है। चमड़ी धीरे धीरे गलने लगती है तथा शरीर के भाग मुड़ने लगते हैं। जिला कुल्लू में हालांकि शुरुआती दौर में वर्ष 2001 से 2003 तक रोगियों का आंकड़ा 30 से अधिक रहा। लेकिन धीरे धीरे इन रोगियों की संख्या में कमी आती गई। अब यह आंकड़ा 12 तक सिमट गया है। यह रोग दो चरणों में होता है पहले चरण में होने वाले रोग को पीबी कहते हैं। दूसरे चरण के रोगी को एमबी कहते हैं। यह चरण रोगी के लिए अधिक घातक होता है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के कुष्ठ रोग इकाई के एलडब्लयू चांद का कहना है कि एक दशक के कम समय में विभाग ने करीब अढ़ाई सौ कुष्ठ रोगियों को रोग मुक्त किया है। आगे भी विभाग कुष्ठ रोगियों को डिटेक्ट करने में लगा है। एक दशक में विभाग के पास आए कुष्ठ रोगियों में ज्यादातर रोगी बाहरी राज्यों से हैं।
