
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह लाहौल घाटी के किसानों के दुखते दिलों को मरहम लगा गए हैं। अमर उजाला में प्रकाशित खबर ‘सीएम के दौरे से लोगों की बड़ी उम्मीद’ जिसमें लाहौल आलू उत्पादक संघ की ओर से किसानों को डाली गई लाखोें रुपयों की रिकवरी और सरकार से आर्थिक मदद का जिक्र किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए केलांग में अपने इस दौरे के दौरान लाहौल आलू उत्पादक संघ को आर्थिक मदद का ऐलान कर दिया है। इससे लाहौल घाटी के सैकड़ों किसानों को राहत पहुंची है, वहीं, लाहौल आलू उत्पादक आर्थिक संकट से उभर आया है। वर्ष 2011 में प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, तो बात उस समय लाहौल के किसानों ने अपने ही आलू उत्पादक संघ को बीज आलू की लाखों बोरियों की आपूर्ति की थी, जिसमें बीस हजार के करीब कट्टे सोसायटी की ओर से मार्केटिंग नहीं करवाने से मैदान में पड़ा-पड़ा खराब हो गया था। इसकी रिकवरी सोसायटी ने किसानों के ऊपर डाल दी थी। सोसायटी के पदाधिकारी कई बार उस दौरान धूमल सरकार से मिले, लेकिन न कोई आर्थिक और न ही कोई ऐलान। बात वहीं सिमट कर रह गई, लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री स्वयं लाहौल में किसानों के बीच आकर 86 लाख रुपयों का लाहौल आलू उत्पादक संघ को आर्थिक मदद देने का ऐलान कर दिया है। रिकवरी के बोझ तले दबे किसान अब इस ऐलान से काफी खुश नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह किसानों को इस रिकवरी के बोझ से झुटकारा दिला देते हैं तो आगामी लोकसभा चुनावों में किसान खुलेआम कांग्रेस का समर्थन करेंगे। इधर, कांग्रेस के जनजातीय सलाहकार परिषद सदस्य प्यारे लाल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जनजातीय क्षेत्र के लोगों के हितैषी हैं वे लाहौल आलू उत्पादक संघ को आर्थिक मदद देकर किसानों को रिकवरी से जरूर राहत दिलाएंगे।
