
भल्याणी (कुल्लू)। लहसुन की सौंधी-सौंधी खुशबू पर कमीशनखोर ही मौज मा रहे हैं। किसानों के पसीने की अधिकतर कमाई का हिस्सा कुछ दलाल लूट जाते हैं। कुल्लु जिले समेत प्रदेश के कई हिस्सों में दलाल माफिया का यह नेटवर्क लंबे अरसे से सक्रिय है। एकाधिकार जमाने के बाद दलाल अब अपनी मर्जी से किसानों से मनमाफिक दाम पर लहसुन की खरीद कर रहे हैं। कमीशन खोरी के इस गोरखधंधे में सैकड़ों किसान पिस रहे हैं। आपसी तालमेल बिठाते हुए इन कमीशनखोरों ने लहसुन के आसमान छूते दामों को धड़ाम से गिराकर रख दिया है। आलम यह है कि बाहरी राज्यों की सब्जी मंडियों में जहां लहसुन के दाम 80 से 90 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं वहीं कुल्लू में 7 से लेकर 25 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से खरीद की जा रही है।
किसानों को मंडियों का ज्ञान न होने से वह इन दलालों को अपना लहसुन बेचने को विवश हैं। प्रदेश में हजारों परिवार लहसुन की खेती से जुड़कर अपने परिवार का लालन-पालन कर रहे हैं। प्रदेश में 3834 हेक्टेयर जमीन पर लहसुन का उत्पादन होता है। इस वर्ष 57482 मीट्रिक टन लहसुन का उत्पादन हुआ था। इसमें कुल्लू जिला में 892 हेक्टेयर भूमि पर 13697 मीट्रिक टन, सिरमौर में 1535 हेक्टेयर भूमि पर 23486 मीट्रिक टन, सोलन में 156 हेक्टेयर भूमि पर 3297 मीट्रिक टन, कांगड़ा जिला में 395 हेक्टेयर भूमि पर 5358 मीट्रिक टन, मंडी में 458 हेक्टेयर भूमि पर 5862 मीट्रिक टन, शिमला में 48 हेक्टेयर भूमि पर 793 मीट्रिक टन तथा किन्नौर में 12 हेक्टेयर भूमि में 25 मीट्रिक टन लहसुन की पैदावार हुई है।
बाहरी राज्यों की सब्जी मंडियों में इन दिनों लहसुन के दाम 80 से 90 रुपये प्रति किलो हैं। बिना लाइसेंस धारक कमीशनखोर किसानों से 7 से 25 रुपये प्रतिकिलो लहसुन की खरीद कर रहे हैं। बदरोल आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन हुकम चंद ठाकुर ने कहा कि दलालों ने पूरे प्रदेश और जिला में अपना नेटवर्क बिछा रखा है। लहसुन उत्पादकों को जमकर लूट रहे हैं।
उड़नदस्तों का होगा गठन
मामला गंभीर है। बिना लाइसेंस के इस नेटवर्क की अगर कोई शिकायत मिली तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इन दलालों पर निगरानी रखने के लिए उड़नदस्तों का गठन किया जाएगा।
सुभाष मंगलेट उपाध्यक्ष विपणन बोर्ड
