किसानों की मर्जी के बिना अब नहीं मिलेगी जमीन

नोएडा। सलारपुर की जमीन का नए सिरे से अधिग्रहण होगा। अब किसानों की मर्जी के बिना जमीन नहीं खरीदी जा सकेगी। ध्यान रहे कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सलारपुर स्थित 182 एकड़ जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। राजेंद्र इस्टेट की ओर से दायर याचिका पर आदेश में कोर्ट ने यह यह भी कहा है कि प्राधिकरण नए सिरे से जमीन का अधिग्रहण कर सकता है।
प्राधिकरण नए सिरे से जमीन अधिग्रहीत करता है तो पुश्तैनी जमीन पर 1490 रुपये और गैर पुश्तैनी जमीन पर 1295 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा देना पड़ेगा। साथ ही दस फीसदी आवासीय भूखंड का लाभ भी मिलेगा। मौजूदा समय में जमीन के कुछ हिस्से पर निर्माण और रोड़ी-बदरपुर का अस्थाई कारोबार चल रहा है। प्राधिकरण के रिकॉर्ड में यह जमीन ग्रीन रिक्रिएशनल सेंटर के लिए है। यानी प्राधिकरण की ओर से इसके दस फीसदी हिस्से पर निर्माण, शेष पर हरियाली रखने की योजना थी। एसीईओ पीके अग्रवाल ने बताया कि मास्टर प्लान में इस जमीन पर ग्रीन रिक्रिएशनल सेंटर प्रस्तावित है।

क्या है अधिग्रहण की प्रक्रिया
जब प्राधिकरण किसी किसान की जमीन लेता है तो उसके लिए धारा-4 का प्रकाशन कराता है। चूंकि अब अर्जेंसी क्लॉज हटाया जा चुका है। इसलिए धारा-4 के बाद 6 और 9 का प्रावधान है। इसमें एक से दो साल तक का वक्त लग जाता है। इस प्रक्रिया को जिला प्रशासन करता है। इसके अलावा दूसरा तरीका यह भी है कि प्राधिकरण सीधे किसान से बात करता है और समझौते के आधार पर जमीन खरीदकर सीधे रजिस्ट्री करा लेता है। इसमें वक्त ज्यादा नहीं लगता।

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