किराया बढ़ाने पर बिफरी जनता

हमीरपुर। न्यूनतम बस किराया और अन्य सफर को महंगा करने पर जनता बिफर गई है। पहले ही महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा है, ऊपर से राज्य सरकार ने किराया बढ़ा दिया है। इस संबंध में अमर उजाला ने लोगों की नब्ज टटोली तो किराये के विरोध में स्वर उभरे। लोगों का कहना है कि सरकार आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं कर रही है। बस ऑपरेटरों को खुश करने के लिए किराया बढ़ा दिया है। मुख्य शहरों के नजदीक स्थित स्थानों से यदि किसी को दिन में दो चार चक्कर लगाने पड़ जाते हैं तो उसे परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कॉलेज, स्कूल जाने वाले छात्रों को परेशानी होगी। प्रतिदिन दस रुपये खर्च करने होंगे या फिर डेढ़-दो किमी का सफर पैदल तय करना होगा।
हमीरपुर निवासी छात्र साहिल का कहना है कि न्यूनतम किराया नहीं बढ़ना चाहिए। सबसे अधिक परेशानी स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को होगी। अभी प्रतिदिन चार रुपये लगते हैं, किराया बढ़ने पर दस रुपये खर्च होंगे। सरकार छात्रों के बारे में भी सोचे।
हमीरपुर के रामकुमार का कहना है कि न्यूनतम किराया 5 रुपये करना गरीबों पर बोझ डालने के समान है। अधिकांश दिहाड़ी मजदूरी वाले लोग बसों में सफर करते हैं। मजदूरी वाले नजदीकी स्थानों पर बसों से ही पहुंचते हैं।
दुकानदार विजय शर्मा का कहना है कि सरकार का निर्णय जनता के हित में नहीं है। न्यूनतम किराया बढ़ने से आम आदमी प्रभावित होगा, एकदम दो रुपये से पांच रुपये किराया करना उचित नहीं है।
दुकानदार महिंद्र सिंह का कहना है कि सरकार किरायों मे बढ़ोतरी कर आम आदमी की अनदेखी कर रही है, सरकार जनहित में निर्णय को वापस ले।
प्रवीण कु मार ने रोष जताते हुए कहा कि सरकार को जनहित में न्यूनतम किराया दो रुपये ही रखना चाहिए। सरकार के निर्णय से छात्र वर्ग, गरीब तबका सबसे अधिक प्रभावित होगा।

Related posts