किताबें पहुंची नहीं, कैसे पढ़ेंगे नौनिहाल

चंबा(गीता)शिक्षा विभाग की लेटलतीफी के चलते शैक्षणिक सत्र शुरू होने के दो माह बाद भी स्कूली बच्चों तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। खासकर शीतकालीन स्कूलों को शुरू हुए करीब दो माह होने को हैं और अभी तक किताबें ही पहुंचाने का काम चल रहा है। ये स्कूल फरवरी माह में शुरू हो जाते हैं। वहीं अन्य स्कूलों का शैक्षणिक सत्र भी मार्च माह में शुरू हुआ था, मगर यहां भी एक माह बाद यही हालात हैं। हैरानी की बात है कि स्कूल शिक्षा बोर्ड के डिपो में अक्तूबर-नवंबर में ही किताबों का स्टाक जमा होने के बावजूद शिक्षा विभाग इन्हें उठाने में दिलचस्पी नहीं दिखाता। जब सत्र शुरू हो जाता है और टीचर रिजल्ट बनाने या अन्य कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं तो उन पर किताबें उठाने का जोर डाला जाता है। इसके चलते बच्चों तक किताबें पहुंचाने में एक से डेढ़ माह का समय लग जाता है। जिले में लगभग 226 मिडल स्कूल हैं। इसके अलावा 1149 प्राइमरी स्कूल हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतना समय बिना किताबों के पढ़ाई से सरकारी स्कूलों के बच्चे निजी स्कूलों से कितने पीछे रह जाते हैं। हालांकि विभाग के अधिकारी किताबें समय पर न मिलने का ठीकरा स्कूल शिक्षा बोर्ड पर फोड़ रहे हैं, मगर स्कूल शिक्षा बोर्ड के परेल स्थित डिपो के इंचार्ज सुरेंद्र मांडला का कहना है कि बोर्ड की किताबें तो अक्तूबर-नवंबर माह से ही प्रकाशित होना शुरू हो जाती हैं और डिपो में पर्याप्त स्टाक होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग ही इन्हें उठाने में देरी करता है। इस तरह कठिन भौगोलिक परिस्थिति और दुगर्म क्षेत्र होने के कारण जिले के स्कूलों में किताबें पहुंचाने में ही एक से दो माह का समय लग जाता है। इसमें जहां बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं स्कूलों के अध्यापक भी परेशानी झेलते हैं।
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बोर्ड से किताबें मिलने में हुई देरी
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के डिप्टी डीईओ ओपी हीर ने कहा कि बोर्ड से ही किताबें देरी से मिली हैं। अब तक कुछ ही स्कूल बचे होंगे, जहां किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों ने अभी तक किताबें नहीं ली हैं, उनके मुखिया जल्द शिक्षा बोर्ड के परेल स्थित डिपो से किताबें प्राप्त कर लें व स्कूलों में पढ़ाई शुरू करवाएं। उन्होंने कहा कि छठी से आठवीं तक की किताबें शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय से चालान कटने पर ही मिलेंगी। पहली से पांचवीं तक के बच्चों की किताबें प्राप्त करने के लिए ब्लाक स्तर पर ही औपचारिकताएं पूरी करने के बाद डिपो से किताबें प्राप्त की जा सकती हैं।
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काफी पहले पहुंच चुकी हैं किताबें: मांडला
बुक डिपो इंचार्ज सुरेंद्र मांडला ने बताया कि डिपो में किताबें काफी पहले पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ट्राइबल के 17 स्कूलों के लिए किताबें वितरित कर दी गई हैं। इसके अलावा अधिकतर प्राइमरी स्कूलों की किताबें भेज दी गई हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे शिक्षक किताबें लेने पहुंच रहे हैं, उन्हें किताबें दी जा रही हैं।
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अध्यापक संघ ने विभाग को दिया है सुझाव : बिजलवान
प्राथमिक सहायक अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश बिजलवान ने कहा कि इस दिक्कत के बारे में संघ ने भी विभाग को अवगत करवाया था। उन्होंने कहा कि पहले डिपो में किताबें आती हैं, फिर पूरे जिले में ब्लाक वाइज किताबें बांटी जाती हैं। इसके बाद ब्लाक से स्कूलों को जाती हैं। इसमें काफी समय लग जाता है। उन्होंने कहा कि इस बार शीतकालीन स्कूलोें की किताबें काफी लेट हो गई हैं। संघ ने विभाग को सुझाव दिया है कि सेशन शुरू होते ही विंटर स्कूलों के टीचरों को डिप्यूट करके किताबें उठा ली जाएं तो इतनी देरी नहीं लगेगी।

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