कनॉट प्लेस से ग्रेनो 80 मिनट में

नई दिल्ली। मेट्रो रेल ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस की सवारी सत्तर से 80 मिनट में कराएगी। यूपी सरकार ने नोएडा सिटी सेंटर से ग्रेटर नोएडा के जिस 29.9 किमी के कॉरिडोर की मंजूरी दी है वह मेट्रो की ब्लू लाइन से सीधी कनेक्टिविटी देगी। जबकि फेस-तीन में बॉटेनिकल गार्डन से जनकपुरी वेस्ट कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा की राह दक्षिण व पश्चिम दिल्ली के लिए आसान करेगी। ग्रेटर नोएडा से मेट्रो में बैठकर महज एक घंटे में कालका जी, नेहरू प्लेस आ सकेंगे। मेट्रो फेस-तीन में जनकपुरी वेस्ट वाया कालिंदी कुंज (37 किमी) का निर्माण 2016 तक पूरा किया जाना है। जबकि यूपी सरकार ने मेट्रो की ब्लू लाइन नोएडा सिटी सेंटर से आगे ग्रेटर नोएडा व बुड़ाकी तक जिस कॉरिडोर को मंजूरी दी है, वह इसके इंटरचेंज स्टेशन बॉटेनिकल गार्डन पर जुड़ेगी। अभी नोएडा या ग्रेटर नोएडा से दक्षिण या पश्चिम दिल्ली आने में काफी टाइम लगता है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि, ब्लू लाइन पर ग्रेटर नोएडा बोर्डर से राजीव चौक तक 30-32 स्टेशन आएंगे जिसमें 65-70 मिनट लगेंगे। अगर अंतिम छोर बुड़ाकी तक देखेंगे तो 37-38 स्टेशन आएंगे जहां पहुंचने में अस्सी मिनट का समय लगेगा। वहीं फेस-तीन के नए कॉरिडोर बॉटेनिकल गार्डन से जनकपुरी में कालकाजी, नेहरू प्लेस तक 28-33 स्टेशन पड़ेंगे जहां पहुंचने में 60-65 मिनट लगेंगे। हालांकि नोएडा से आधे घंटे में नेहरू प्लेस की दूरी तय हो जाएगी। एक स्टेशन की दूरी तय करने में औसतन 2 से सवा दो मिनट लगते हैं।
जनकपुरी वेस्ट से बॉटेनिकल गार्डन कॉरिडोर पर बॉटेनिकल गार्डन, कालकाजी, हौजखास और जनकपुरी वेस्ट इंटरचेंज स्टेशन बनेंगे। इसके कारण नोएडा या ग्रेटर नोएडा कॉरिडोर से जुड़ते हुए किसी हिस्से से आने वाले यात्री को दक्षिण दिल्ली के आईटी हब नेहरू प्लेस, कालकाजी मंदिर, हौज खास आना बहुत आसान हो जाएगा। इतना ही नहीं गुड़गांव, बदरपुर और द्वारका कॉरिडोर के लिए ट्रेन बदल सकेंगे। इसके साथ ही बदरपुर, कश्मीरी गेट या फरीदाबाद जाने के लिए भी मंडी हाउस से ट्रेन बदल सकेंगे। द्वारका सेक्टर-21 तक जाने वाली लाइन के लिए ट्रेन नहीं बदलनी पड़ेगी जबकि जनकपुरी वेस्ट की लाइन के लिए बॉटेनिकल गार्डन पर ट्रेन बदलनी होगी।

ग्रेनो को 2018 से पहले नहीं मिल पाएगी मेट्रो
यूपी सरकार ने नोएडा सिटी सेंटर से बुड़ाकी तक कॉरिडोर को बेशक मंजूरी देकर 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इतने बड़े सेक्शन का निर्माण 2017 तक कर पाना आसान नहीं है। डीएमआरसी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी स्वीकारते हैं कि 29.5 किमी के प्रोजेक्ट को पूरा करने में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स, डीएमआरसी बोर्ड से स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया के बाद कम से कम साढ़े तीन से चार वर्ष का समय लगेगा। वर्ष 2013 के सात महीने गुजर चुके हैं ऐसे में 2018 से पहले मेट्रो रेल ग्रेनो को मिलनी मुश्किल है।

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