कई पर्यटन स्थल सैलानियों से कोसों दूर

खराहल (कुल्लू)। सूबे में कई मनोरम पर्यटन स्थल सैलानियों की कदमताल से कोसों दूर हैं। वजह, ये पर्यटन स्थल सुविधाओं के अभाव में काफी पिछड़े हुए हैं। इन पर्यटन स्थलों पर ट्रैकिंग के बहाने कुछ गिने-चुने सैलानी ही पहुंचते हैं। अगर सरकार इन पर्यटन स्थलों के विकास को लेकर पहल करे तो स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
कुल्लू-मनाली की हामटा पीक, भृगु एरिया, चंद्रखणी, दसहौर तथा मणिकर्ण की खीरगंगा आदि स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं किया गया है। ऐसे में हाई प्रोफाइल सैलानी सुविधा के अभाव में यहां नहीं पहुंच पाते हैं। वैसे तो 1990 में प्रदेश सरकार ने पर्यटन को सूबे का मुख्य उद्योग घोषित किया है, लेकिन इसके बावजूद मनमोहक जगहाें को कोई भी सरकार विकसित नहीं कर पाई है। आजादी के बाद आज तक किसी सरकार ने यहां के लिए सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को मुहैया करवाने की जहमत तक नहीं उठाई है। ऐसे इन खूबसूरत पर्यटन स्थलों तक सैलानी अपेक्षाकृत नहीं पहुंच पाते हैं। अब लोस चुनाव के समय यह एक बड़ा मुद्दा घाटीवासियों ने नेताओं के सामने उठाया है। घाटी के राम चंद्र, केशव राम, कमल ठाकुर, राजेश, सुरेश, नवीन, देवराज तथा नागेंद्र का कहना है कि इन स्थलों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां की हसीन वादियों में गगनचुंबी देवधार, कायल, बुरांस, बान और रईतोष के पेड़ तथा रंगबिरंगे फूल सैलानियों को अपनी ओर बरबस आकर्षित करते हैं, लेकिन खेद की बात है कि किसी भी सरकार ने इन स्थलों को विकसित नहीं किया। लोगों का कहना है कि सियासी मंचों पर टूरिज्म को बढ़ावा देने वादे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कहानी कुछ और ही बयां होती है। कहा कि इन स्थलों को सरकार पर्यटन के लिहाज से विकसित करती है तो स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के साधन भी खुलेंगे और सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।

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