कइयों को जिंदगी दे गया 108 का साथ

केलांग/कुल्लू। 108 एंबुलेंस सेवा लाहौल और कुल्लू घाटी के दुर्गम इलाकों के लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। लाहौल घाटी जहां विशेष चिकित्सकों की कमी से जूझ रही वहीं 108 सेवा दुर्घटनाओं में घायल लोगों के लिए बड़ी राहत दे रही है। पहाड़ी इलाकों होने के कारण यहां वाहनों का दुर्घटनाग्रस्त होना रोजमर्रा की बात हो चुकी है। ऐसे में पहाड़ी इलाके के लोगों के लिए 108 की मुफ्त सेवा महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।
जिला अस्पताल केलांग में आपातकालीन मेडिकल विभाग के तकनीशियन अनिल ने बताया कि मंगलवार को सिस्सू के पास एक बस और कार के बीच हुई टक्कर में घायल बस चालक को सिस्सू अस्पताल में ले जाया गया। मेडिकल जांच के बाद चिकित्सक डा. विकेश ने चालक को कुल्लू रेफर कर दिया था। 108 एंबुलेंस ने बिना देरी किए घायल को रोहतांग दर्रा होते हुए महज तीन घंटों में कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचा दिया। अब चालक खतरे से बाहर बताया जा रहा है। लाहौल पंचायत पंचायत संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कुमार ने कहा कि यह सेवा लाहौल जैसे दुर्गम क्षेत्र में घायलों और मरीजों के लिए वरदान साबित हुई है।
इस योजना का शुभारंभ प्रदेश में 25 दिसंबर 2010 को हुआ था। 29 माह 10 दिन में प्रदेश के तीन लाख लोगों को आपातकालीन सेवा प्रदान की गई है। प्रदेश प्रभारी मेहुल सुकुमारन तथा कुल्लू के प्रभारी राकेश शर्मा ने बताया कि जिला कुल्लू में 16695, बिलासपुर में 23501, मंडी में 39685, शिमला में 44792, कांगड़ा में 48958, किन्नौर के 1642, लाहौल-स्पीति में 949, सोलन में 25361,चंबा में 26272, ऊना में 16748,सिरमौर में 30349 तथा हमीरपुर में 25122 लोगों ने 108 एंबुलेंस का लाभ उठाया है। इसमें 287268 को मेडिकल, 10297 को पुलिस तथा 2509 लोगों को फायर की सहायता से सेवा प्रदान की है।

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