…और रहस्यमय हुआ वर्दीधारियों द्वारा बंधक बनाने का मामला

अमृतसर: जालंधर से अमृतसर आ रहे 3 वैन सवारों को बंधक बनाने का वर्दीधारी जवानों का मामला उस समय नया मोड़ ले गया जब जालंधर के 2 थानों की पुलिस पहले तो हदबंदी का विवाद बताते हुए एक-दूसरे थाने के प्रभार में घटना होने का आरोप लगाते रहे, किंतु आज उन्होंने इस मामले में इसे देहाती क्षेत्र का बताते हुए मामले को और भी रहस्यमय बना दिया जिससे मामले की टोह लेने वाले पत्रकारों की जांच के कोण ही बदल गए, किंतु इस प्रकरण ने उस समय यू-टर्न ले लिया जब जालंधर देहाती पुलिस के कप्तान युरेंद्र सिंह हेयर व एस.पी. (डी.) राजिंद्र सिंह ने बताया कि गुदाईपुर ऐसा कोई इलाका उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और न ही उनके कोई जवान मकसूदां चौक पर तैनात थे। इससे कई प्रश्न खड़े हो गए हैं:
1. क्या थाना डिवीजन नंबर. 1 और मकसूदां पुलिस की हदबंदी के बारे में थाना प्रभारियों को जानकारी नहीं?
2. मकसूदां चौक व गुदाईपुर में नाका किस पुलिस अधिकारी के आदेश पर लगाया गया?
3. यदि वर्दीधारी जवान पुलिस के नहीं थे तो उनके पास पुराने हथियार व प्रयोग की गई वॢदयां कैसे आ गईं? जबकि ए.एस.आई. के पास रिवाल्वर भी था।
4. यदि वर्दीधारी असली थे तो पुलिस अभी तक शिनाख्त क्यों नहीं कर पाई?
5. पुलिस उच्च अधिकारी का यह कहना कि वह इस मामले को अपने एंगल के अनुसार ट्रेस करेंगे, किंतु 2 दिन बीत जाने के बाद नए एंगल के क्या मायने हैं?
6. यदि वर्दीधारियों की आपराधिक इच्छा न होती तो चालक के आग्रह करने पर मालिक से फोन पर बात करने से क्यों कतराए? जबकि पुलिस नियमों के अनुसार किसी भी हिरासत में लिए व्यक्ति की सूचना उसके वारिसों को देनी होती है।
7. यदि वर्दीधारी किसी ड्यूटी पर होते तो मुंह छिपाकर अंधेरे में खिसक न जाते?

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