एनसीआर सेवा यहां से नहीं

एनसीआर में यूपी, हरियाणा व राजस्थान के कई जिले आते हैं।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट दुरुस्त करने के लिए चारों राज्यों के बीच समझौता तो हो चुका है लेकिन बॉर्डर के नजदीकी शहर गुड़गांव, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद तक भी ऑटो-टैक्सी का रास्ता नहीं खुला है।

ऑटो के परमिट नहीं हैं जबकि टैक्सी की प्री-पेड बूथ पर पर्ची नहीं कटती। इंटरनेशनल व डोमेस्टिक एयरपोर्ट पर 20 फीसदी अतिरिक्त किराए के साथ लोकल टैक्सी प्री-पेड बूथ से मिलती हैं जबकि रेलवे स्टेशन पर यात्री भटकते रहते हैं।

24 बूथ बनाए
ट्रैफिक पुलिस ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे समेत व्यस्त जगहों पर 24 प्री-पेड सेवा बूथ बनाए हैं।

ऑटो रिक्शा की प्री-पेड सेवा सभी बूथ पर है जबकि टैक्सी इंटरनेशनल व डोमेस्टिक एयरपोर्ट, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (अजमेरी गेट साइड व पहाड़गंज साइड) पर ही मिलती है।

एनसीआर में आवागमन का परमिट दिए जाने के बावजूद वहां के लिए टैक्सी का सफर निर्धारित किराए पर भी नहीं मिल पा रहा है।

यात्रियों का कहना है कि सरकार व ट्रैफिक पुलिस को सेवा देनी चाहिए। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड व शहरी विकास मंत्रालय को हस्तक्षेप करके ऑटो रिक्शा को परमिट दिलाना चाहिए।

झगड़े के डर से चिपकाई पर्ची
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्री-पेड बूथ पर दैनिक ऑटो रिक्शा की 500 और टैक्सी की 150 से अधिक पर्ची कटती हैं।

ऑटो-टैक्सी चालक बताते हैं कि कई यात्री टैक्सी से गाजियाबाद, फरीदाबाद जाना चाहते हैं लेकिन प्री-पेड पर पर्ची नहीं कटती।

बूथ पर संवाददाता ने पाया कि ‘एनसीआर सेवा यहां से नहीं’ की पर्ची भी चिपकाई गई है।

यह बात सामने आई कि यात्री सेवा मांगते हैं, मना करने में कई बूथ संचालक से उलझ भी जाते हैं।

स्टेशन पर भटकते हैं यात्री
नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली व निजामुद्दीन स्टेशन पर एनसीआर के यात्री ऑटो-टैक्सी के लिए भटकते हैं।

कई यात्रियों ने इस बात की भी शिकायत की कि थोड़ी दूर का प्री-पेड बूथ से अधिक किराया लिया जाता है।

तीन किलो मीटर की परिधि में एकसमान किराया लेते हैं। नई दिलली रेलवे स्टेशन से चांदनी चौक, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन या बस अड्डा कश्मीरी गेट जाने का किराया 75 रुपये चुकाना होता है जबकि तीनों के बीच दूरी में काफी अंतर है।

प्री-पेड से ऑटो रिक्शा लेना है तो कम से कम 33 रुपये और टैक्सी लेनी है तो 53 रुपये देने पड़ते हैं।

चालक करते हैं वसूली
दिल्ली परिवहन विभाग ने एनसीआर के लिए लोकल टैक्सी को परमिट तो दिए हैं लेकिन अलग से शर्तें रख दीं।

जिन लोगों ने परमिट लिये, उन्हें लोकल किराए पर सवारी को सेवा देनी है। हालांकि, इस पर परिवहन विभाग कोई खास ध्यान नहीं दे रहा है।

यही वजह है कि ट्रैफिक पुलिस अभी तक प्री-पेड बूथ पर पर्ची नहीं काटती है जबकि चालक वसूली करते हैं।

रेडियो टैक्सी है ऑप्शन लेकिन किराया अधिक
रेडियो टैक्सी सेवा में एनसीआर का ऑप्शन है लेकिन हर यात्री उस खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं है।

प्रति किमी 23 रुपये किराए के अलावा 50 रुपये बुकिंग चार्ज अतिरिक्त चुकाने होते हैं। इतना ही नहीं बुकिंग भी कुछ देर पहले ही मिल पाती है।

हालांकि, इकोनॉमी रेडियो टैक्सी थोड़ा सस्ता विकल्प है लेकिन इनके पास कोई कॉल सेंटर नहीं है।

फिर स्टेशन के आसपास मिल भी जाएं तो मीटर से चलने को तैयार नहीं होते। हालंकि उन्होंने एनसीआर के परमिट लिए हुए हैं।

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