
-मेला प्रवेश टिकट बुक माई शो पर ऑन लाइन लिया जा सकता है। प्रवेश टिकट वेबसाइट� www.haryanatourism.gov.in पर भी लिया जा सकता है। ई-टिकटिंग पर भेजा जाने वाला एक एसएमएस ई-टिकट के लिए वैध होगा। मेला प्रवेश टिकटों का भुगतान एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस के पेमैंट गेटवे अर्थात डेबिट/क्रेडिट कार्ड – मास्टर/वीजा/मैस्ट्रो और 25 बैंकों की नेट बैकिंग के माध्यम से किया जा सकता है।
-शनिवार-रविवार को 50 की जगह 100 रुपये सिर्फ एंट्री के देने पड़ेंगे। वीकेंड पर भीड़ नियंत्रण के लिए यह निर्णय लिया गया है। इन दो दिन को छोड़कर ग्रुप में आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए 50 फीसदी छूट जारी रहेगी। यानी उन्हें 25 रुपये देने होंगे। विशेष सक्षम लोगों, वरिष्ठ नागरिकों और सेवारत सैनिकों को प्रवेश टिकट पर 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
-मेले में हेलीकॉप्टर राइडिंग के लिए पांच मिनट के 2000 हजार रुपये लगेंगे। इसकी सुविधा पवन हंस देगा।
-वरिष्ठ नागरिकों और विशेष सक्षम लोगों की सुविधा के लिए आग्रह पर गोल्फ कार्ट और बैट्री चालित रिक्शा उपलब्ध हैं।
-मेला मैदान 40 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसमें शिल्पकारों के लिए 766 वर्क हट्स बनाए गए हैं।
-मेला परिसर में प्लास्टिक/पॉलीथिन बैग के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है।
-प्राचीन सूर्यकुंड की भव्य विरासत को उजागर करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से सुबह 10.00 बजे से शाम 5.30 बजे तक इस स्मारक को आगंतुकों के लिए खुला रखा जाएगा।
-मेला परिसर में 120 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 60 नाइट विजन हैं।
-सुरक्षा के लिए 1500 पुलिसकर्मी लगाए गए हैं।
-इस वर्ष मेले में 18 देश आएंगे। इनमें कंट्री पार्टनर के रूप में लेबनान को शामिल किया गया है। इसके अलावा श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान और बांग्लादेश, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस फेडरेशन (मास्को), बेलारूस, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, जॉर्जिया और ताजिकिस्तान, कुवैत, कतर, थाईलैंड, युगांडा और सीरिया शामिल हैं।
-इस वर्ष का थीम स्टेट छत्तीसगढ़ है। छत्तीसगढ़ अपनी आदिवासी विरासत और संस्कृति प्रस्तुत करेगा जो बस्तर के जंगलों में अब भी अच्छी तरह संरक्षित पाई जाती है। छत्तीसगढ़ के कलाकार लोकनृत्य पंथी, रावत नाच पंडवानी, चैत्रा, काकसर, साइला और सौवा का जीवंत शो प्रस्तुत करेंगे।
