
मैहतपुर (ऊना)। स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र के स्विस गार्नियर नामक दवा उद्योग प्रंबधन और मजदूरों के बीच दो माह से चल रहा गतिरोध बुधवार को खत्म हो गया है। करीब दो माह पूर्व मजदूरों को नौकरी से हटाए जाने को लेकर विरोध में श्रमिकों ने लगाया तंबू बुधवार को श्रम विभाग के आश्वासन के बाद हटा लिया है। उद्योग प्रबंधन और मजदूरों में गतिरोध के खत्म होने की श्रम अधिकारी मनीश करोल ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दवा उद्योग में कार्यरत मजदूरों को नौकरी से हटाए जाने को लेकर करीब आधा दर्जन श्रमिक विरोध जताते हुए धरने पर बैठे थे। इस बीच अनेक दफा उद्योग प्रबंधन और मजदूरों के बीच समझौते के असफल प्रयास भी होते रहे। न्याय के लिए मजदूरों ने श्रम विभाग से लेकर उद्योगमंत्री तक से गुहार लगाई, लेकिन गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था। दवा उद्योग प्रबंधन में एचआर प्रमुख संदीप प्रभाकर ने कहा कि कंपनी तो पहले से ही श्रमिकाें के हित की बात करती रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के इस विरोध के चलते कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
श्रम अधिकारी भी रहे निशाने पर
स्थानीय दवा उद्योग के मजदूरों के इस धरना प्रदर्शन के दौरान इंटक के प्रदेश महासचिव कामरेड जगत राम ने ऊना से तबदील हो चुके एक श्रम अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने श्रम विभाग के अफसरों पर जिला शिकायत निवारण कमेटी की बैठक में उद्योग प्रबंधन की एक पक्षीय बोली बोलने के भी शिकायत की थी।
मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंचा था मामला
दवा उद्योग यूनियन के मजदूर नेताओं ने अपनी फरियाद इंटक के प्रदेश महासचिव कामरेड जगतराम शर्मा की अगुवाई में 23 अक्तूबर को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दरबार में भी लगाई थी। मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग को इस मसले हल के निर्देश दिए थे।
