ईस्टर्न रोड केंद्रीय तारघर बन जाएगा इतिहास

नई दिल्ली। 1857 की क्रांति के दौरान आपात संदेश भेजने में अहम भूमिका निभाने वाले ईस्टर्न कोर्ट केंद्रीय तारघर अब इतिहास बन कर रह जाएगा। अंग्रेजों के समय से चली आ रही टेलीग्राम सेवा का 158 साल बाद रिटायरमेंट का तार आने के बाद ऐसा हुआ है। ज्ञात हो कि, देश भर में तार सेवा को 15 जुलाई से बंद किया जा रहा है।
दिल्ली में अंग्रेजों के समय ईस्टर्न कोर्ट नई दिल्ली और कश्मीरी गेट में तार घर खोले गए थे। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट, जनकपुरी और दिल्ली कैंट में तारघर खोेले गए। सबसे पुराना तारघर ईस्टर्न कोर्ट का है। अंग्रेज यहीं से फौज तक आपात सूचना पहुंचाने और इंग्लैंड व अन्य देशों तक तार की बुकिंग कराते थे। यही नहीं दिल्ली कैंट स्थित तारघर से सेना के जवान व अधिकारी अपने घर तक आपात संदेश भेजते थे। उनके घर से भी यहां तक संदेश पहुंचते थे। इस तार घर से ही दिल्ली की बड़ी आबादी की यादें भी जुड़ी हुई हैं।
ईस्टर्न कोर्ट केंद्रीय तारघर के कर्मचारी रामनंदन बताते हैं कि वे 1983 से ही यहां नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने ऐसा भी दौर देखा है, जब तार भेजने के लिए यहां लंबी-लंबी कतारें लग जाती थी। उनकी मांग तारघर को संग्रहालय बनाने की है। ईस्टर्न कोर्ट केेंद्रीय तारघर के कई कर्मचारियों ने तारघर को बंद करने के निर्णय पर अप्रसन्नता जाहिर किया। बीएसएनएल टेलीग्राम सेवा के सीनियर जीएम शमीम अख्तर बताते हैं कि ईस्टर्न कोर्ट और कश्मीरी गेट तार घर अंग्रेजों के समय का है। उस समय फौज को सूचना देने के लिए भी टेलीग्राम का इस्तेमाल किया जाता था।

आदेश से कर्मचारी आहत
खुशी और गम का आपात संदेश देनेवाले टेलीग्राम को 15 जुलाई से बंद करने की बीएसएनएल की घोषणा से कर्मचारी भी आहत हो गए है। ईस्टर्न कोर्ट केंद्रीय तारघर, कश्मीरी गेट, सुप्रीम कोर्ट, जनकपुरी और दिल्ली कैंट स्थित तारघर के कर्मचारी भी दुखी है। कर्मचारियों की मानें तो अंग्रेजों के समय से चली आ रही इस सेवा को बंद नहीं करना चाहिए था।

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