
दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार 70 में से 67 वर्तमान विधायक एक बार फिर अपना भाग्य आजमा रहे हैं। विधायकों की यह संख्या एक रिकॉर्ड है।
पिछले चुनावों में 62 विधायकों का चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड था।
इस बार अप्रत्यक्ष रूप से यह रिकॉर्ड शत-प्रतिशत है क्योंकि तीन विधायक किन्हीं कारणों से खुद दंगल में नहीं कूदे और उनकी सीट पर उनके ही परिवार के सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं।
इस बार कांग्रेस, भाजपा, निर्दलीय और अन्य दलों के 67 वर्तमान विधायक चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं तीन वर्तमान विधायक अप्रत्यक्ष तौर पर चुनाव से जुड़े हुए हैं। इनमें भाजपा के प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा व ओपी बब्बर और कांग्रेस के दयानंद चंदेला शामिल हैं।
मल्होत्रा एवं बब्बर के निर्वाचन क्षेत्र से उनके बेटे चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि चंदेला के क्षेत्र से उनकी पत्नी चुनाव मैदान में हैं।
इस बार कांग्रेस ने अपने 41 में से 40 विधायकों को टिकट दिया है। इसके अलावा उसने बसपा, राष्ट्रीय जनता दल और भाजपा से आए तीनों विधायकों को भी टिकट दे दिया।
इस तरह उसके चुनाव चिह्न पर 43 वर्तमान विधायक चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भाजपा के 21 विधायकों को टिकट मिला है। पिछली बार नजफगढ़ से निर्दलीय विधायक बने भरत सिंह इस बार इंडियन नेशनल लोकदल से चुनावी दंगल में हैं।
उनकी तरह बीते चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर मटिया महल से जीते शोएब इकबाल इस बार जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं, गोकलपुर से बसपा के टिकट पर पिछला चुनाव जीते सुरेंद्र कुमार ने निर्दलीय ताल ठोंकी है।
वर्ष 1993 में विधायक बने 70 में से 49 ने 1998 के चुनाव में फिर से भाग्य अजमाया था। इनमें से केवल 27 ही चुनाव जीते पाए थे।
वहीं, वर्ष 2003 के चुनाव में 58 विधायक दंगल में कूदे और उनमें से 46 ही जीते।
वर्ष 2008 के चुनाव में वर्तमान विधायकों के चुनाव लड़ने के आंकड़े में एक बार फिर इजाफा हुआ। इस चुनाव में 62 विधायक लड़े और उनमें से 49 ने जीत दर्ज की।
अब देखना है कि इस चुनाव में चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड बनाने वाले 67 विधायक जीतने का भी रिकॉर्ड बना पाते हैं या नहीं?
