‘इस्लाम में गे सेक्स और लिव-इन रिलेशन हराम’

बरेलवी मरकज की दरगाह आला हजरत ने समलैंगिकता और लिव इन रिलेशन के खिलाफ फतवा जारी किया है। शरीयत का जिक्र करते हुए इस फतवे में इन दोनों संबंधों को हराम करार दिया गया है।

दरगाह से जुड़े मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती मोहम्मद अफजाल रजवी ने अखलाक अहमद सिद्दीकी नूरी नाम के शख्स के सवाल पर यह फतवा दिया है। समलैंगिक संबंधों को हराम बताते हुए फतवे में दो हदीसों का हवाला दिया गया है।

हदीस दुर्रे मुख्तार के हवाले से कहा गया है कि जो लोग इस कृत्य में लिप्त हैं, उनके लिए शरीयत में आग में जला देने, उन पर दीवार गिरा देने या उन्हें ऊंची जगह से गिरा देने और पीछे से पत्थरों की बारिश करने जैसी सजाएं मुकर्रर की गई हैं।

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समलैंगिकता को शरीयत में हमजिंसी हराम-ओ-फाअशी कहा गया है और इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं दी गई है। एक दूसरे हदीस का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस बदफेली की वजह से कौम-ए-लूत तबाह कर दी गई थी जो इस्लाम से पहले एक कौम थी।

फतवे में इसी तरह बिना शादी औरत-मर्द का साथ रहना भी हराम करार दिया गया है। इसमें कहा गया है कि गैर मनकूहा यानी गैर शादीशुदा को घर में नहीं रखा जा सकता। उसके साथ खिलवत यानी शारीरिक संबंध या फिर सोहबत जिना-ए-खालिस यानी संतानोत्पत्ति के लिए संबंध बनाना दोनों हराम हैं।

शरीयत के मुताबिक ऐसे संबंधों से पैदा बच्चे भी हराम कहलाएंगे। उन्हें जन्म देने वाले की औलाद नहीं माना जाएगा, न वे उसकी विरासत की हकदार होंगे। ऐसी औरत को पत्नी का अधिकार हासिल नहीं होगा।

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इस मामले में अहले सुन्नत मुस्लिम मूवमेंट के कौमी सदर नबीरे आला हजरत मौलाना तसलीम रजा खां ने भी कहा है कि उनकी जानकारी में किसी ने भी ऐसे रिश्तों को जायज नहीं माना है। न कोई धर्म इसकी इजाजत देता है। यह इंसानियत से गिरी हुई बात है।

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