
कुल्लू। काला माह पौष संक्रांति का आगाज होते ही जिले के 365 देवी-देवता राजा इंद्र की सभा के लिए रवाना हो गए हैं। रविवार दोपहर को स्वर्ग लोक के लिए रवाना होने से पूर्व देवता के हारियानों तथा देवलुओं ने अपने कुलज देवता की विशेष पूजा-अर्चना की। अधिष्ठाता देव शृंगाऋषि, खुडीजल तथा माता बूढ़ी नागिन सहित घाटी के 365 देवी-देवता एक से तीन माह तक राजा इंद्र की सभा में रहेंगे। इस दौरान साल भर घटित हुई घटनाओं का लेखा-जोखा भी सभा में पेश किया जाएगा। पौष संक्रांति के इस काले माह में देवी-देवता कई प्रकार की शक्तियां लेकर वापस लौटेंगे। स्वर्ग लोक पर गए अधिकतर देवी-देवता मकर संक्रांति को धरती पर आएंगे। ऐसे में एक माह की अवधि में कुल्लू घाटी में न तो ढोल बजेगा और न ही कोई देव कारज किया जाएगा। इतना ही नहीं, कपाट बंद होने से इस दौरान हारियान अपने आराध्यों की पूजा-अर्चना भी नहीं कर पाएंगे। जिला के बाह्य सराज के साथ-साथ घाटी के बंजार, सैंज, गड़सा, मणिकर्ण, लगवैली, खराहल तथा ऊझी घाटी के समस्त देवी-देवता इंद्र की सभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। रविवार को स्वर्ग प्रवास पर जाने से पहले शृंगाऋषि, खुडीजल, मारकंडेय ऋषि पेड़चा, मारकंडेय ऋषि वलागाड़, देवी पंचाली, माता बूढ़ी नागिन घियागी, शेष नाग जिभी, जमदगिभन ऋषि सहित देवता जमलू निर्धारित समय के तहत स्वर्ग लोक के लिए कूच कर गए। जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव टीसी महंत ने कहा कि पौष संक्रांति से लेकर मकर संक्रांति तक जिला के करीब 365 देवी-देवताओं के कपाट बंद हो गए हैं। देवताओं के स्वर्ग लोक जाने से अगले एक माह तक घाटी में कोई भी देव कारज नहीं किया जाएगा।
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इन देवताओं के कपाट खुले रहेंगे
स्वर्ग प्रवास पर बाह्य सराज आनी-निरमंड क्षेत्र के देवी-देवता भी निकल गए हैं। लेकिन, इन देवताओं के मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे। श्रद्धालु पौष माह में भी देवता खुडीजल, टकरासी नाग, देवता चंभु, रावल ऋषि, नारायण ऋषि, व्यास ऋषि कुइंर, कोट पुझारी तथा बिशलू नाग सहित करीब सौ देवी-देवताओं के दर्शन कर सकेंगे। इन देवताओं के सभी देव कारज और मेले भी नियमित रूप से चलते रहेंगे। देवता खुडीजल के कुल पुरोहित फौजी लाल शर्मा तथा देवता कोट पुझारी के कारदार भागे राम राणा ने यह जानकारी दी है।
