आतंकी शहजाद दोषी करार

नई दिल्ली। बटला हाउस एनकाउंटर मामले में अदालत ने इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य शहजाद अहमद को दोषी करार दिया है। निचली अदालत ने शहजाद को एनकाउंटर में शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या व अन्य कई धाराओं में दोषी ठहराया है। सजा पर 29 जुलाई को अदालत में बहस होगी।
साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ने शुक्रवार को खचाखच भरी अदालत में शहजाद को हत्या, हत्या की कोशिश, सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर गोली चलाने, सबूत मिटाने व आर्म्स एक्ट की धाराओं में दोषी ठहरया।
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 70 गवाह अदालत में पेश किए थे। इनमें से छह चश्मदीद थे, लेकिन यह सभी एनकाउंटर करने वाली टीम के सदस्य थे। पब्लिक का कोई गवाह इनमें नहीं था। यूपी पुलिस के एक अधिकारी ने भी गवाही दी थी। शहजाद ने अपने पक्ष में दो गवाह मोहम्मद जीशान और मोहम्मद सैफ को पेश किया था। इन दोनों की गवाही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई थी।
अदालत से फैसला आने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता एस कमर ने कहा कि फैसले की कॉपी आने के बाद ही वह कोई टिप्पणी करेंगे। वह इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। शहजाद अहमद को यूपी एटीएस ने एक फरवरी, 2010 को आजमगढ़ स्थित उसके गांव सराय मीर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया था। एनकाउंटर के दौरान भागे जनैद को पुलिस नहीं पकड़ पाई। उसके सिर पर पांच लाख रुपये का इनाम है।

क्या है बटला हाउस मामला
राजधानी में 13 सितंबर, 2008 को करोल बाग, कनॉट प्लेस, जीके व इंडिया गेट पर सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इन धमाकों की जांच के दौरान पुलिस को ओखला के बटला हाउस इलाके में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। सीरियल ब्लास्ट की जांच कर रही पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने 19 सितंबर, 2008 को बटला हाउस के फ्लैट नंबर एल-18 में दबिश दी। फ्लैट में मौजूद आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस गोलीबारी में इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा बुरी तरह जख्मी हो गए थे। जबकि हवलदार बलवान सिंह व राजबीर जख्मी हो गए थे। बाद में स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की मृत्यु हो गई थी। पुलिस की जवाबी गोलीबारी में फ्लैट में मौजूद आतिफ अमीन उर्फ बशीर और मोहम्मद साजिद मारे गए थे। गोलीबारी के बीच मौका पाकर शहजाद अहमद और आरिज खान उर्फ जुनैद फरार हो गए थे। पुलिस ने मौके से मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार कर लिया था।

फर्जी होने के आरोप
कई संगठनों व नेताओं ने फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया था। इसके मद्देनजर मामले की जांच स्पेशल सेल के बजाय क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने 29 अगस्त, 2010 को चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस का कहना था कि एनकाउंटर में मोहम्मद सैफ की कोई भूमिका नहीं थी और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था। अदालत ने शहजाद अहमद के खिलाफ 15 फरवरी, 2011 को आरोप तय किए थे।

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