
केलांग। बेरोजगारी के इस दौर में मुश्किल से हाथ आई नौकरी भी छूट जाए तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा। प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड की लापरवाही के कारण ऐसे ही एक युवक की नौकरी खतरे में पड़ गई है। करीब पांच साल पहले सिविल इंजीनियरिंग का तीन वर्षीय कोर्स पास आउट करने के बावजूद युवक को तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने अभी तक डिप्लोमा जारी नहीं किया है। आखिर यह डिप्लोमा कहां गायब हो गया है यह एक बड़ा सवाल है। डिप्लोमा के साथ इस युवक का सुनहरा भविष्य जुड़ा है। हालांकि इस बीच कमीशन क्वालीफाई कर इस युवक को प्रोविजनल डिप्लोमा के आधार पर हिमाचल पावर कारपोरेशन में कनिष्ठ अभियंता की नौकरी मिल गई है, लेकिन अभी तक विभाग में ओरिजनल डिप्लोम जमा नहीं कर पाने के कारण इस युवक की नौकरी खतरे में पड़ गई है। पावर कारपोरेशन ने युवक को ओरिजनल डिप्लोमा जमा करने के लिए अल्टीमेटम जारी कर दिया है। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के स्पीति उपमंडल के कीह गांव के सोनम रिंनचेन ने साल 2008 में सुंदरनगर स्थित पॉलीटेक्निकल कालेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पास किया है। दोरजे ने इस परीक्षा में 60 फीसदी अंक लिए हैं। संस्थान ने उसे इस दौरान प्रोविजनल डिप्लोमा जारी किया था। कमीशन पास करने के बाद प्रोविजनल सर्टीफिकेट के आधार पर दोरजे को वर्ष 2010 में हिमाचल पावर कारपोरेशन में बतौर कनिष्ठ अभियंता की नौकरी मिल गई। इस बीच दोरजे ने ओरिजनल डिप्लोमा के लिए सुंदरनगर संस्थान और तकनीकी शिक्षा बोर्ड में कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब पावर कार्पोरेशन ने डिप्लोमा जमा करने के लिए उसे अल्टीमेटम जारी कर दिया है। जिससे दोरजे की नौकरी खतरे में पड़ गई है। सवाल यह है कि संस्थान और बोर्ड से दोरजे का डिप्लोमा आखिर कहां गायब हो गया है। उधर, तकनीकी शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक एके आहूजा ने संपर्क करने पर कहा कि वे इस मामले को लेकर बोर्ड के सचिव से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि डिप्लोमा जारी होने में किस स्तर पर लापरवाही हुई है इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। आहूजा ने कहा कि युवक को किसी भी सूरत में डिप्लोमा जारी कर दिया जाएगा।
