
ज्वालामुखी/नादौन (हमीरपुर)। आओ इस धरती को स्वर्ग बनाएं। तब मृत्यु के पश्चात इसकी चिंता करने की जरूरत ही नहीं रहेगी। यह लोक सुंदर बना लेते हैं, तब हमारा परलोक अवश्य ही सुंदर हो जाएगा। हम भव सागर से अवश्य ही पार हो जाएंगे और ईश्वर के दरबार में उजला चेहरा लेकर जाएंगे। उक्त उद्गार बाबा हरदेव सिंह जी महाराज जी ने राज्य स्तरीय निरंकारी संत समागम के दौरान व्यक्त किए।
दो दिवसीय समागम में भाग लेने के लिए हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पधारे हैं। बाबा जी ने कहा कि आज संसार में मानव तो बहुत हैं, पर मानवता नहीं है। अगर मानवता होती तो आज धरती स्वर्ग से भी सुंदर होती। कट्टर पंथी धर्म के नाम पर रक्तपात यह सोच कर करते हैं कि अपने धर्म को बचाने के लिए कार्यों को करने से स्वर्ग की प्राप्ति होगी परंतु यह बिल्कुल भी संभव नहीं है। कोई यहां नर्क बनाकर, वहां स्वर्ग कैसे बना सकता है? कोई भी व्यक्ति औरों की हत्या करके स्वयं मृत्यु से कैसे बच सकता है।
बाबा जी ने कहा कि यदि मानवता मजबूत हो तो धर्म सहज ही बचा रहता है। वास्तविक धर्म प्रेम, दया, सहनशीलता और शांतिपूर्वक सह अस्तित्व का पाठ पढ़ाता है। जैसे कबीर जी ने कहा है कि मात्र पठन-पाठन से कोई धार्मिक नहीं बनता, वास्तविकता में धार्मिक केवल प्रेम से ही बना जा सकता है। निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी ने कहा कि सभी गुरु, पीर, पैगंबरों तथा भक्तों ने मानव को स्वार्थ, संकीर्णता का त्याग करके मानव एकता को अपनाने के लिए कहा है। संतों ने सदा एकत्व का पाठ पढ़ाया है। समागमों का उद्देश्य मानव मात्र को जागृत करना और संतों के द्वारा दर्शाए गए मार्ग को समय रहते शीघ्र ही अपनाने का संदेश देना है।
