
नई दिल्ली। होम्योपैथ और आयुर्वेद के चिकित्सक एलोपैथिक दवा मरीजों को लिखें, यह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) को स्वीकार नहीं है। आईएमए का कहना है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की अधिसूचना मरीजों के हित में नहीं है। एसोसिएशन ने अधिसूचना वापस लेने की मांग की है।
आईएमए के सचिव डॉक्टर नरेंद्र सैनी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की जारी अधिसूचना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। कोई भी चिकित्सक बिना एमबीबीएस की पढ़ाई के कैसे एलोपैथ की दवा लिख सकता है। उन्होंने कहा कि यदि आयुर्वेद अथवा होम्योपैथ की पढ़ाई करने के बाद उनका पंजीकरण स्टेट मेडिकल काउंसिल से हो जाता है तो किसी को एमबीबीएस की इतनी कठिन पढ़ाई पढ़ने की क्या जरूरत है। वहीं आईएमए के उपाध्यक्ष डॉक्टर केके अग्रवाल का कहना है कि सरकार के इस फैसले से मरीजों के साथ-साथ होम्योपैथी, आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा पद्धति को भी नुकसान होगा। इससे पुरानी चिकित्सा पद्धति खत्म हो जाएगी।
