
मैहतपुर (ऊना)। सूबे में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के रिकार्ड को कंप्यूटराइज किया जाएगा। इससे प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्रों की अनेक तरह की अहम जानकारियों को विभाग इन आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त कर सकेगा। पुराने रिकार्ड को नये ढंग से सहेजने के लिए विभाग ने कवायद भी शुरू कर दी है। अर्थात मौजूदा रिकार्ड को अपडेट करके नई लुक में तबदील किया जाएगा।
बाल विकास परियोजना अधिकारी रूपेश तोमर ने इस बात की पुष्टि की है। पता चला है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए उस क्षेत्र की प्रत्येक अहम जानकारी को एकत्र करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं की मदद से हर छोटी बड़ी जानकारी जुटाना चाहती है जिससे ग्रामीण स्तर पर हो रहे बदलाव से प्रत्येक विभाग को अपडेट रखा जा सके। आंगनबाड़ी केंद्रों के मौजूदा रिकार्ड को नये सिरे से सहेजने की विभागीय कवायद शुरू हो गई है।
आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्त्ताओं को बाकायदा विभाग ने ट्रेनिंग देने का दौर शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा रिकार्ड को नये सिरे से तैयार करते वक्त किन किन बिंदुओं पर गौर किया जाएगा और रिकार्ड को किस प्रकार तैयार किया जाना है, इसे लेकर तीन दिनों का विशेष प्रशिक्षण आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं को दिया जा रहा है।
सूबे के आंगनबाड़ी केंद्रों में चूंकि शिशुओं की तादाद बेहद कम है और आंगनबाड़ी केंद्र गली गली में खोल दिए गए हैं। लिहाजा इन कार्यकर्त्ताओं से सरकार उनके आंगनबाड़ी केंद्रों के तहत आते क्षेत्रों के तहत सरकारी एवं निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या, किस स्कूल में पढ़ते हैं, कब पढ़ना शुरू किया, कब स्कूल छोड़ा, पारिवारिक पृष्ठभूमि, उन परिवारों की आर्थिक दशा आदि अनेक ऐसी जानकारियां लेकर रिकार्ड तैयार किया जाएगा।
क्या कहता है विभाग
बाल विकास परियोजना अधिकारी रूपेश तोमर बताते हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों के रिकार्ड को कंप्यूटराइज करने में तो हालांकि काफी वक्त लगेगा, हां इसके लिए अभी से तैयारी अवश्य शुरू कर दी गई। उसी के अनुरूप रिकार्ड तैयार करवाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं को वह खुद प्रशिक्षण देकर इसके लिए तैयार कर रहे हैं।
