अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ में घमासान

कुल्लू। कर्मचारी नेताओं में छिड़ी सियासी जंग अब टोपी के रंग पर आ अटकी है। एक धड़े का आरोप है कि कुछ माह पहले जो कर्मचारी नेता लाल टोपी घुमाकर राजनीति करते थे वे अब हरे रंग की टोपी पहनने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इन स्वयंभू नेताओं की बदली चाल को जिले के हजारों कर्मचारी भली भांति जानते हैं। दरअसल टोपी के रंग से ही प्रदेश में धूमल और वीरभद्र सरकार के समर्थक कर्मचारी नेताओं की पहचान होती है। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रदेश महासचिव सेस राम आजाद, जिला अध्यक्ष आशु गोयल तथा वरिष्ठ नेता एलआर गुलशन ने कहा कि जो कर्मचारी नेता महासंघ के प्रति सच्ची निष्ठा रखते हैं, वह कभी भी अपने स्वार्थों के लिए संघ को विघटन की स्थिति में नहीं ले जाते। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रदेश महासचिव सेसराम आजाद ने कहा कि विरोधी धड़े के 13 जुलाई को हुए बालक राम गुट के चुनाव को गलत ठहराया।
उन्होंने कहा कि 110 विभागों से बने महासंघ को कुछ मुट्ठी भर लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए जिले के कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं। महासंघ के पूर्व प्रेस सचिव एलआसर गुलशन ने इन स्वयंभू कर्मचारी नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह लोग मौसमी कपड़ों की तरह अपने आप को बदलने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि 15 जुलाई को जिला अराजपत्रित कर्मचारी संघ के चुनाव संवैधानिक तरीके से होंगे। इसमें जिला भर से सभी सात खंडों से प्रधान, महासचिव और चुने हुए प्रतिनिधि भाग लेंगे।

बौखलाहट में बोल रहे विरोधी : बालकराम
कुल्लू। समानांतर संघ के मुख्य सलाहकार बालक राम ठाकुर ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने उन्हें मान्यता नहीं दी थी। ऐसे में टोपी बदलने का सवाल ही नहीं होता। बौखलाहट में विरोधी अनापशनाप बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के चुनाव संवैधानिक तरीके से पूर्ण करवाए गए हैं।

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