
कर्णप्रयाग। सब कुछ सुनियोजित तरीके से हुआ तो जल्द ही विदेशी पशु प्रजनन केंद्र भराड़ीसैंण में केंद्रीय चारा स्टेशन खुलेगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। केंद्र की टीम यहां पहुंचकर भौगोलिक स्थिति एवं व्यवस्थाओं का जायजा लेगी।
14 नवंबर वर्ष 1979 में स्थापित विदेशी पशु प्रजनन केंद्र के उद्देश्य को सार्थक करने के लिए अब प्रदेश सरकार और पशुपालन विभाग ने भी कमर कस ली है। विभागीय अधिकारियों के केंद्र के विकास के लिए भेजे प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार ने अमल करते हुए केंद्रीय चारा स्टेशन खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विभिन्न प्रजाति के घास का होगा उत्पादन
केंद्रीय चारा स्टेशन में पशुओं के लिए बहुपयोगी चारा एवं घास उपलब्ध कराने के लिए जमीनी स्तर पर शोध के आधार पर काम किया जाएगा। क्षेत्र में पाए जाने वाली घास की विभिन्न प्रजातियों और चारा का वर्गीकरण कर उसकी उपयोगिता के आधार पर उत्पादन किया जाएगा।
गोबर से हो रही आय
भराड़ीसैंण पशु प्रजनन केंद्र के पास इस समय 600 कुंतल से अधिक गोबर का भंडार है। वन विभाग ने 17 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से बीते दिनों दो सौ कुंतल गोबर खरीदी है। केंद्र ने बीते दिनों विदेशी नस्ल के छह सांड भी यूपी की एक संस्था को बेचे हैं, जिससे उसे अच्छी आय हुई है।
फामेटा भी होगी जल् द शुरू
विदेशी पशु प्रजनन केंद्र में चारा उगाने के लिए 1987-88 में जर्मनी से खरीदी गई और कस्टम ड्यूटी जमा न करने से वर्ष 1992-93 में सीज फामेटा मशीन को जल्द शुरू करने के प्रयास भी तेज हो गए हैं।
कोट-
सरकार ने भराड़ीसैंण में वैटनरी कालेज के स्थान पर अब केंद्रीय चारा स्टेशन खोलने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाले केंद्र की शासन स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो गई है। – डा. लोकेश कुमार परियोजना निदेशक विदेशी प्रजनन केंद्र भराड़ीसैंण
