अब पांच साल चलेंगे किसान क्रेडिट कार्ड

शिमला। हिमाचल में किसान क्रेडिट कार्ड की वेलिडिटी को पांच साल कर दिया गया है। अब किसानों को सारा कर्ज वापस कर अपना खाता तीन साल में नहीं, बल्कि पांच साल में रिन्यू करना होगा। नाबार्ड ने प्रदेश के तमाम बैंकों को नए निर्देश लागू करने को कहा है। शिमला में हुई एक क्षेत्रीय कार्यशाला में बैंकों से आए प्रतिनिधियों को नए निर्देशों को लागू करने के रिमाइंडर दिए गए हैं। इसका लाभ प्रदेश के लगभग साढे़ पांच लाख किसान क्रेडिट कार्डधारक किसानों को होगा।
नाबार्ड की शिमला कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा दिल्ली के नाबार्ड और वाणिज्यिक बैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें संशोधित किसान क्रेडिट कार्ड योजना को ठीक से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। संशोधित योजना में किसान क्रेडिट कार्डोें (केसीसी) की वेलिडिटी तीन से पांच साल तक बढ़ाना प्रमुख है। इसके अलावा सीमांत किसानों के लिए सामान्य मूल्यांकन से फ्लेक्सी केसीसी देने के भी निर्देश हैं। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि 12 महीने से ज्यादा समय के लिए कोई भी विदड्रावल आउटस्टैंडिंग नहीं रहेगा। तीन लाख रुपये तक के कर्ज के लिए कोई भी प्रोसेसिंग फीस जमा नहीं होगी। कर्ज की पहली प्राप्ति के दौरान केवल एक बार ही दस्तावेज देने होंगे। इसके बाद खड़ी की गई फसल और प्रस्तावित फसल के बारे में सामान्य घोषणा ही करनी होगी। किसान एटीएम कार्ड से पैसे निकाल सकेंगे।
नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय शिमला के सहायक महाप्रबंधक ठाकुर सिंह नेगी ने माना है कि पांच दिसंबर की कार्यशाला में सभी बैंक अधिकारियों को संशोधित किसान क्रेडिट योजना को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें वेलिडिटी को बढ़ाकर पांच साल करने सहित अन्य प्रावधान किए गए हैं।

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