
हमीरपुर। स्कूलों में मिड डे मील के लिए अब फूड लाइसेंस का होना अनिवार्य है। बिना फूड लाइसेंस कोई भी स्कूल मिड डे मील नहीं पका सकता है। अब लाइसेंस बनाने के लिए गुरुओं को भी विभागों के चक्कर काटने पड़ेंगे। पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ बढे़गा। इसका सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पढ़ेगा।
फूड लाइसेंस के लिए एसएमसी कमेटी के अध्यक्ष, मुख्याध्यापक या प्रधानाचार्य ही फूड लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। बीएमओ या खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। फूड लाइसेंस एक से पांच साल तक वैध होगा। एक साल के पंजीकरण को एक सौ और पांच साल के पंजीकरण को पांच सौ रुपये फीस भरनी होगी। फीस विभाग के निदेशालय के दिए गए बैंक खाता में जमा करवानी होगी। मिड डे मील वर्कर का मेडिकल किसी भी मेडिकल अधिकारी से बनवाना होगा।
मिड डे मील के लिए फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है। आवेदन के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदन के लिए अभी तक अंतिम तिथि निर्धारित नहीं हुई है। अधिसूचना जारी होते ही स्कूलों के मुखियाओं को अवगत करवा दिया जाएगा।
-डा. पीआर कटवाल, सीएमओ
ऑनलाइन भी कर सकते हैं आवेदन
मिड डे मील के लिए फूड लाइसेंस लेने को स्कूल ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए फूड सिक्योरिटी एंड स्टेंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर लॉगआन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन से पहले पंजीकरण फीस की चालान संख्या होना जरूरी है।
सप्ताह में तीन स्कूलों का निरीक्षण
मिड डे मील योजना के तहत पकने वाले खाने की जांच करने के लिए बीएमओ को आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रत्येक बीएमओ टीम सहित सप्ताह में कम से कम तीन स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगा। इसकी रिपोर्ट बीएमओ को उच्चाधिकारियों को भेजनी होगी। निरीक्षण के दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
शिक्षकों पर न थोंपे और जिम्मेवारी
प्राथमिक शिक्षक संघ खंड भोरंज के महासचिव विलक्षण ठाकुर, हमीरपुर खंड के प्रधान राजेश पठानिया, प्रदेश पदाधिकारी नंद किशोर नड्डा का कहना है कि स्कूलों में फूड लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में अध्यापकों को न उलझाया जाए। अध्यापकों के जिम्मे पहले ही अन्य बहुत से काम दे रखे हैं। लाइसेंस प्रक्रिया की औपचारिकताओं को उपनिदेशक स्तर पर ही निपटाया जाए। लाइसेंस बनवाने की सारी जिम्मेवारी स्कूलों पर न थोपें।
