
चंडीगढ़: पत्नी से क्रूर व्यवहार, विश्वास तोडऩे तथा धोखाधड़ी कर करीब 41 लाख रुपए की एफ.डी. हथियाने के मामले में पूर्व हाईकोर्ट जज के आरोपी बेटे के खिलाफ पुलिस ने अदालती आदेशों के दो दिन बाद भी एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की है। इसको लेकर पीड़िता अनु भंडारी ने संबंधित डी.एस.पी. से भी बात की मगर पुलिस जांच के बाद मामला दर्ज करने की बात कह रही है। आरोपी प्रदीप पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज के.पी. भंडारी का बेटा है।
ऐसे में पीड़िता ने सी.जे.एम. कोर्ट में शिकायत दी है। इस पर अदालत ने पुलिस से मामले में 23 जुलाई तक जवाब मांगा है। जानकारी के मुताबिक दस्तावेत बरामद करने जैसे मामले में बिना एफ.आई.आर. दर्ज किए ठोस कार्रवाई संभव नहीं है।
मामले में गुरचरण नामक पुलिसकर्मी जांचकत्र्ता है। वहीं दूसरी और सत्र न्यायलय में आरोपी प्रदीप भंडारी की अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। इस पर अदालत ने सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की है।
3 जुलाई को दी थी शिकायत
अनु भंडारी ने प्रदीप के खिलाफ सी.जे.एम. अदालत में 3 जुलाई, 2013 को शिकायत दी थी। इससे पहले अनु ने पुलिस को प्रदीप के खिलाफ शिकायत दी थी, जिस पर पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी। सी.जे.एम. ने प्रदीप के खिलाफ थाना 3 पुलिस को एफ.आई.आर. दर्ज करने के आदेश दिए थे।
इससे पहले प्रदीप भंडारी के खिलाफ थाना 19 पुलिस ने 22 मई को अनु भंडारी की शिकायत पर उसके साथ क्रूर व्यवहार, आपराधिक ढंग से विश्वास तोडऩे की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
मामला
सी.जे.एम. कोर्ट में दी शिकायत में अनु ने कहा था कि प्रदीप ने उसे मानसिक व शारीरिक रुप से प्रताडि़त किया जिस कारण वह डिप्रैशन में रहने लगी थी। इसका फायदा उठाकर प्रदीप ने अनु की करीब 41 लाख रुपए की 15 एफ.डी. को रिन्यु करवाने के नाम पर उसके हस्ताक्षर करवा अपने व अपनी मां प्रभा भंडारी के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
इसकी जानकारी मिलने पर अनु ने एस.एस.पी. विंडो पर शिकायत दी। यहां से मामला पहले पुलिस थाना 3 व आगे इ.ओ.डब्ल्यू. को ट्रांसफर हो गया।
आरोप के मुताबिक न तो विभाग ने संबंधित बैंक से ट्रांजसैक्शन की जानकारी हासिल की और न ही शिकायतकत्र्ता की बात सुनी। सीधा मामला कानूनी राय के लिए भेज दिया। यहां भी मामला दबा रहा। अनु की शादी प्रदीप से वर्ष 1997 में हुई थी। सालों तक बर्दाश्त करने के बाद बच्चों की जिंदगी खराब होती देख अनु ने पुलिस में प्रदीप के खिलाफ क्रूरता का मामला दर्ज करवाया था।
सत्र न्यायधीश की शिकायत भी लंबित
प्रदीप भंडारी को हाल ही में आपराधिक धाराओं के तहत दायर मामले में अग्रिम जमानत देने वाली सत्र न्यायधीश शालिनी नागपाल के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायधीश एस.के. अग्रवाल को अनु भंडारी ने एक शिकायत दी थी। इसमें न्यायधीश शालिनी नागपाल द्वारा आरोपी प्रदीप भंडारी को जिन तथ्यों के आधार पर जमानत दी गई है उन पर सवाल खड़े किए गए थे। इसको लेकर शालिनी नागपाल के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। मामला हाईकोर्ट में विजीलैंस जज के पास लंबित है।
