सीनियर होकर भी मिला जूनियर बैच

बिलासपुर। खामियां शिक्षण संस्थानों की है या शिक्षा विभाग के नियमों में खोट। सीनियर होकर भी सूबे के हजारों सीएंडवी एवं टीजीटी टेट पास बीएड धारकों का बैच (वरिष्ठता) एक साल पीछे खिसक गया। सीनियर बैच में होते हुुए भी वह जूनियर बैच में गिने जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक कश्मीर विश्वविद्यालय से बीएड करने वाले हजारों सीएंडवी और टीजीटी टैट पास शिक्षकों को प्रमाणपत्र एक साल बाद मिला है। अब शिक्षा विभाग बैच प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि मान रहा है। मसलन जून 1997 में कइयों ने कश्मीर विश्वविद्यालय से बीएड की। लेकिन विवि की ओर से उन्हें इसका प्रमाणपत्र फरवरी 1998 में जारी किया गया। शिक्षा विभाग ऐसे शिक्षकों को 1998 बैच का मान रहा है न कि 1997 बैच का। इससे कई शिक्षकों की बैच ईयर को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं।
सीएंडवी एवं टीजीटी शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग दोहरे मापदंड अपना रहा है। शिक्षा विभाग ने टैट पास अभ्यर्थियों के टैट प्रमाण पत्र को देखे बिना ही कंशीडर कर लिया है। सीएंडवी एवं टीजीटी टैट पास संघ के प्रदेश अध्यक्ष केशव कुमार शर्मा ने कहा कि विभाग दोहरी नीति अपना रहा है। कश्मीर विश्वविद्यालय ने साफ तौर पर लिखकर दिया है कि अभ्यर्थियों ने मई-जून 1997 में बीएड की परीक्षा पास कर ली है। फिर भी बोर्ड प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि को ही कंशीडर कर रहा है। इससे उनकी वरिष्ठता एक साल पीछे खिसक गई है। उधर, एलीमेंटरी शिक्षा के निदेशक राजीव शर्मा ने कहा कि नियमानुसार प्रमाण पत्र जारी होने की तिथि की कंशीडर की जा सकती है।

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