अधूरी रह गई राष्ट्रपति अवार्ड की चाह

बरठीं (बिलासपुर)। अदम्य साहस, सूझबूझ तथा धैर्य से भीषण बस दुर्घटना में 54 लोगों की जान बचा चुके चालक श्रीराम की राष्ट्रपति आवार्ड मिलने चाह दिल में दब कर रह गई। जिला बिलासपुर एचआरटीसी से सेवानिवृत्त बहादुर बस चालक श्रीराम शर्मा को बहादुरी पुरस्कार से न नवाजे जाने पर मलाल है। चालक श्रीराम को विभाग द्वारा 500 रुपये के साथ प्रशस्ति पत्र सम्मान स्वरूप दिया गया।
बिलासपुर डिपो में तैनात श्रीराम 27 अप्रैल 1989 को डलहौजी-शिमला रूट पर बस नंबर एचआईबी-832 को लेकर डलहौजी से वापस आ रहा था कि बड़-द्रमण/ कांगड़ा नामक स्थान पर विपरीत दिशा से गलत दिशा में चले आ रहे एक स्कूटर पर सवार दो व्यक्तियों को बचाते हुए बस को ऐसी स्थिति से गुजारना पड़ा, जो सचमुच में देखने वालों के होश उड़ा देने वाली थी। एमडी एचआरटीसी शिमला द्वारा फाइनेंस कमिश्नर-कम-सेक्रेटरी ट्रांसपोर्ट प्रदेश सरकार को पुरस्कार के लिए अनुमोदित उसके नाम के पत्र संख्या एचओ:9ई-909/89ए डीबीआर से पता चलता है कि चालक श्रीराम आफ बिलासपुर यूनिट ने डलहौजी-शिमला रूट पर दो स्कूटर सवारों की जान को बचाते हुए जहां बस में सवार अन्य 50 से अधिक लोगों की जान बचाई। पत्र में वर्णित है कि सड़क तंग थी तथा चालक ने वक्त की नजाकत को समझते हुए सूझबूझ के साथ धैर्य का परिचय देते हुए बस को पहाड़ी पर चढ़ा दिया। इसमें स्कूटर सवार तो बच गए। वहीं, कोई भी बड़ी घटना नहीं घटी। उन्होंने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, सोनिया गांधी को पत्र लिखा, लेकिन किसी ने भी इस बहादुरी की कीमत नहीं पहचानी। पंचायत प्रधान घंढीर भाग सिंह, उपप्रधान विजय कौशल, पूर्व बीडीसी उपाध्यक्ष मंगल सिंह ठाकुर, सुन्हाणी पंचायत प्रधान गायत्री देवी, बरठीं पंचायत प्रधान देवकृष्ण नड्डा, विनोद कुमार, ओम प्रकाश, बलवंत चंदेल, सुनील कुमार, सूबेदार प्रकाश चंद, रोशन लाल व कश्मीर सिंह ने सरकार से मांग की है कि श्रीराम को अवार्ड प्रदान दिया जाए।

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