दुनिया के लिए डिजिटल इंडिया क्रांति बन रही है मिसाल : प्रोफेसर पॉल माइकल रोमर

दुनिया के लिए डिजिटल  इंडिया क्रांति बन रही है मिसाल : प्रोफेसर पॉल माइकल रोमर

भारत तकनिकी का इस्तेमाल करते हुए शिखर की ओर अग्रसर । नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर पॉल माइकल रोमर ने भारत की डिजिटल क्रांति सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इसके माध्यम से लोगों के जीवन को न सिर्फ आसान और सरल बनाया है, बल्कि दुनिया के सामने भी एक मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया पहल को 1 जुलाई, 2015 को लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना और डिजिटल साक्षरता में सुधार करना है।

भारत की यात्रा पर आए नोबेल पुरस्कार विजेता ने आम लोगों तक डिजिटल पहुंच को आगे बढ़ाने और इसे देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति बहुत दिलचस्प है क्योंकि इसका उपयोग सरकार की ओर से समाज के सभी सदस्यों को लाभ प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। यह दुनिया के अधिकांश देशों से बहुत अलग है, जहां कुछ ही लोगों को इसका लाभ मिलता है। भारत की कहानी अनूठी है क्योंकि यहां सभी को इसका लाभ मिल रहा है।

प्रोफेसर पॉल ने भारत के डिजिटल परिवर्तन के एक अनूठे पहलू की ओर इशारा किया और कहा कि इसका अनुकरण करके दक्षिण एशियाई राष्ट्र भारी लाभ उठा सकते हैं। इस सवाल पर कि भारत की डिजिटल सफलता दक्षिण एशियाई देशों के लिए एक आदर्श कैसे बन सकती है, उन्होंने कहा कि यूपीआई, आधार, डीबीटी और डिजिलॉकर जैसी अन्य ऑनलाइन सेवाओं ने जबरदस्त सफलता दिखाई है। दक्षिण एशियाई देश इनका अनुकरण कर अपने यहां भी इस तरह की सफलता की कहानी लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य देशों, विशेष रूप से दक्षिण एशियाई देशों को यह विश्वास होना चाहिए कि अगर भारत यह कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं।

2018 में संयुक्त रूप से मिला नोबेल पुरस्कार
बोस्टन कॉलेज में अर्थशास्त्र के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पॉल एक अमेरिकी अर्थशास्त्री और नीति उद्यमी हैं। वह अक्टूबर 2016 में विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री बने और जनवरी 2018 तक इस पद पर रहे। उन्हें अर्थशास्त्र के लिए 2018 नोबेल पुरस्कार (विलियम नॉर्डहॉस के साथ साझा) से नवाजा गया।

Related posts