
पुलिस अपनी दृढ इच्छा शक्ति से कार्य करे तो कोई भी मामला अनसुलझा नहीं रह सकता ।और अपराधिक प्रवृति के लोगो पर अंकुश लगाया जा सकता है । ऐसे ही कुछ खास कर गुजरने का जज्बा हमारे कुछ पुलिस कर्मियों को कई संगीन मामलो में निभाते देखा गया है । इसी प्रकार की उत्कृष्ट सेवा के लिए हिमाचल पुलिस में कार्यरत एएसआई रंजना का नाम भी हमें गौरव की अनुभूति करवाता है ।
राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए सम्मानित एएसआई रंजना शर्मा ने लापता 50 लापता बच्चों की तलाश कर घर पहुंचाया है। इसके अलावा उन्होंने पति-पत्नी के झगड़ों का निपटारा किया है। थानों में सेवाएं देकर उन्होंने करीब 1500 शिकायतों का निपटारा किया। पोक्सो एक्ट के तहत उनकी ओर से किए गए सराहनीय कार्यों के लिए जज ने भी सराहना की है। एनडीपीएस व एक्साइज के कई मामलों की जांच कर उन्हें सुलझाया है। रंजना शर्मा ने बताया कि राष्ट्रपति पुलिस पदक पाकर खुश हैं। इससे पहले उन्हें सराहनीय कार्य के लिए भी पदक से नवाजा गया है। उन्होंने इसका श्रेय अपनी माता पुन्नी देवी और पिता दुनीचंद को दिया है। रंजना रामपुर के भद्राश की रहने वाली हैं।
एचआरटीसी की बस में बम रखने का पर्दाफाश इंस्पेक्टर नागदेव ने किया था। हिमाचल में उस समय भाजपा की सरकार थी। शांता कुमार मुख्यमंत्री थे। एचआरटीसी की बस चंडीगढ़ से धर्मशाला आ रही थी। सूचना मिली कि बस में किसी ने बम रखा है। उन्होंने मैहतपुर-ऊना बैरियर में बस खड़ी कराकर बम को बाहर निकाला था। इस बस में 56 लोग सवार थे। जिला कुल्लू में सेवाएं देते हुए भांग उखाड़ो अभियान में अहम योगदान रहा है। कई चरस, अफीम वाले सलाखों के पीछे पहुंचाए। हाईकोर्ट से भागे आरोपी को भी उन्होंने पकड़ा है। वह सराहनीय सेवाएं के लिए पुरस्कार देने के लिए खुश हैं।
एसपी संदीप धवल ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का किया पर्दाफाश
