किसान आंदोलन से कोयला, खाद और बारदाना संकट गहराया, थर्मल पावर भी बंदी की कगार पर

किसान आंदोलन से कोयला, खाद और बारदाना संकट गहराया, थर्मल पावर भी बंदी की कगार पर

चंडीगढ़
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के रेल ट्रैक बैठने के कारण सभी तरह की ट्रेनें बंद हैं । इसके चलते पंजाब में कोयला, खाद और बारदाना नहीं पहुंच रहा है।  इससे एक तरफ जहां राज्य में थर्मल पावर बंद होने की कगार पर हैं वहीं दूसरी तरफ खाद और बारदाना न पहुंचने के कारण खेती और फसल खरीद पर संकट गहरा गया है।

सरकार ने कोयले के स्टॉक की स्थिति को गंभीर करार दिया है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एनपीएल के पास स्टॉक में 1.05 लाख मीट्रिक टन कोयला बचा है जो मात्र  6 दिन के लिए  पर्याप्त है। इसी तरह टीएसपीएल के पास 93,949 मीट्रिक टन कोयला 2.79 दिनों के लिए , जीवीके के पास 4341 मीट्रिक टन कोयला 0.62 दिनों के लिए और जीजीएसटीटीपी रोपड़ के पास 85,618 मीट्रिक टन कोयला है जो 6.16 दिन तक चलेगा। इसी तरह जीएचटीपी लेहरा मोहब्बत में 59,143 मीट्रिक टन कोयला बचा हुआ है जो 4.22 दिन चल सकता है।
यूरिया: जरूरत है 13.5 लाख टन, है सिर्फ 1.7 लाख टन
किसानों के विरोध प्रदर्शन के चलते राज्य में यूरिया और डीएपी की भी कमी होने लगी है। सूबे में यूरिया की वर्तमान आवश्यकता 13.5 लाख टन है, जबकि वर्तमान उपलब्धता  केवल 1.7 लाख टन है।  इसी तरह, डीएपी की 6 लाख मीट्रिक टन की जरूरत है जबकि उपलब्धता अभी सिर्फ 4.6 लाख मीट्रिक टन है। खाद्यान्नों की आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसान आंदोलन से 10 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न प्रभावित हुआ है।

मुरादाबाद और दिल्ली में फंसा है 24480 गांठ बारदाना
पंजाब आ रहीं बारदाने की 24,480 गांठें दिल्ली और मुरादाबाद में पड़ी हुई हैं। जिनमें से 22,800 गाठें राज्य एजेंसियों और 1680 गांठें एफसीआई की हैं। कोलकाता से भेजी जाने वाली बारदाना की  7480 गांठें भी फंसने की संभावना है। राज्य में पहले से ही बारदाना की कमी है। बारदाना नहीं मिलने से तरनतारन, मनसा, फिरोजपुर और फाजिल्का जिलों में गेहूं की खरीद प्रभावित होगी।

 

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