पंजाब बंद, बाजारों में सन्नाटा, सड़कों पर अन्नदाता, चप्पे-चप्पे पर दिखी पुलिस

पंजाब बंद, बाजारों में सन्नाटा, सड़कों पर अन्नदाता, चप्पे-चप्पे पर दिखी पुलिस

पंजाब
कृषि विधेयकों के विरोध में किसान संगठनों द्वारा दी गई पंजाब बंद की कॉल का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला। कई शहरों में बाजार और चौक-चौराहे बिल्कुल सुनसान दिखे। बसों के पहिए थमे रहे। रेलवे स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा। प्रदेश के विभिन्न जगहों में रेलवे ट्रैक और सड़कों पर किसान-मजदूर और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता डटे रहे। प्रदेश भर में बंद का असर देखने को मिला है।

अमृतसर: बसों का पहिया जाम, रेलवे स्टेशन पर छाया सन्नाटा, चप्पे-चप्पे पर दिखी पुलिस
कृषि विधेयकों के विरोध में किसान-मजदूर संगठनों द्वारा दी गई पंजाब बंद की कॉल का गुरुनगरी में पूरा असर दिखा। गुरुनगरी की जीवन रेखा हॉल गेट, लारेंस रोड सहित ड्राई फ्रूट और करियाना मार्केट पूर्णतया बंद रही। बसों का पहिया जाम रहा।
रेलवे द्वारा 24 से 26 सितंबर तक अमृतसर से चलने वाली सभी गाड़ियों को रद्द करने से रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा छाया रहा। बंद के दौरान किसी भी संभावित घटना को रोकने के लिए शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी।

कस्बा जंडियाला गुरु के गांव देवीदासपुर के रेल ट्रैक पर दूसरे दिन भी सैकड़ों किसान-मजदूर डटे रहे। ट्रैक पर शामियाना लगा कर बैठे इन किसानों-मजदूरों के लिए संत बाबा कश्मीर सिंह भूरीवालों ने लंगर की सेवा की। यह धरना 26 सितंबर तक जारी रहेगा। किसानों के अनुसार, उसके बाद नए संघर्ष की घोषणा की जाएगी।

शिअद (बादल) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया सहित कई शिअद विधायकों ने अपने-अपने हलके में प्रदर्शन किया। इनमें अमृतसर के सभी बादल समर्थक एसजीपीसी सदस्यों ने भी हिस्सा लिया। सीमावर्ती कस्बे अटारी, लोपोके, चुगावा, अजनाला और राजासांसी में अकाली कार्यकर्ता मोदी सरकार के खिलाफ खूब गरजे।

श्री हरमंदिर साहिब में कम रही श्रद्धालुओं की संख्या
किसान संगठनों की पंजाब बंद की कॉल का प्रभाव श्री हरमंदिर साहिब में भी देखने को मिला। दरबार साहिब में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम थी। आवाजाही के सभी मार्ग बंद होने के कारण श्रद्धालु सचखंड नहीं पहुंच सके। वहीं जहां शहर की सभी मार्केट और दुकानें बंद थीं, वहीं सचखंड की तरफ जाने वाले विरासती मार्ग के आसपास स्थित दुकानें खुलीं रहीं।

लुधियाना: राजमार्गों पर चक्काजाम, शहर में मुख्य बाजार खुले
कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को बंद को लेकर किसान यूनियन व राजनीतिक पार्टियां ने दिन भर चक्का जाम रखा। अगर लुधियाना की बात करे तो शहरी एरिया में बंद का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। दिन भर शहरी इलाकों के मुख्य बाजार खुले रहे। कुछ दुकानें बंद भी रहीं। ग्रामीण इलाकों में बंद पूरी तरह से सफल रहा। लुधियाना शहर गुजरने वाले हर स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर यातायात पूरी तरह से ठप रहा। किसान यूनियनों ने हाईवे को सुबह से जाम कर दिया था।

केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के खिलाफ प्रदेश की 31 किसान यूनियन लामबंद हो चुकी हैं। सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी सहित अकाली दल, आम आदमी पार्टी भी विधेयकों के खिलाफ मैदान में उतर चुकी है। शुक्रवार को बंद का एलान किया गया था। शुक्रवार सुबह से ही किसान यूनियन के नेताओं ने मेन रोड पर चक्का जाम करना शुरू कर दिया। हाईवे पर ट्रैक्टर लगाकर किसी वाहन को गुजरने नहीं दिया गया। लाडोवाल टोल प्लाजा, फिरोजपुर रोड, गिल रोड, चंडीगढ़ रोड, दिल्ली रोड पर किसान यूनियन ने ट्रैफिक व्यवस्था को ठप कर दिया।

प्रदेश में 5 हजार करोड़ का कारोबार रहा ठप: जिंदल
फेडरेशन ऑफ पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशंस के प्रधान बदीश जिंदल ने बताया कि हर रोज पंजाब में लगभग पांच हजार करोड़ का कारोबार होता है। शुक्रवार के बंद के कारण सब कुछ लगभग ठप ही रहा है। बंद के चलते बैंकिंग कारोबार भी नहीं सका है। लुधियाना में हर रोज 1200 करोड़ का ट्रांजेक्शन होता है। कोविड 19 के चलते इंडस्ट्री पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है। अब ऐसे बंद हमारे ऊपर एक और बोझ डाल रहे है। पंजाब सरकार को चाहिए कि इंडस्ट्री को बचाने के लिए ऐसे बंद से दूर रखना चाहिए।

बंद होजरी कारोबार की हालत पतली करेंगे: थापर
निटवेयर क्लब लुधियाना के चेयरमैन विनोद थापर बताते हैं कि कोरोना के कारण होजरी का कारोबार पहले ही 45 फीसदी रह गया है। अब कृषि विधेयक को लेकर ऐसे बंद इंडस्ट्री की आर्थिक हालत को और पतला करेंगे। हमें तो डर है कि अगर यह बंद कहीं लंबा चला तो इंडस्ट्री को तबाह होने से फिर कोई नहीं बचा सकता है। लुधियाना होजरी का गढ़ है, पहले ही हमें सरकार ने अन्य इंडस्ट्री के मुकाबले एक माह लेट खोलने के आदेश दिए थे। सर्दी के उत्पादों को तैयार करने का काम 50 फीसदी रह गया है। अब होजरी कारोबार थोड़ा रफ्तार लेने लगा है कि ऐसे बंद उसकी रफ्तार को ब्रेक लगा रहे है।

पटियाला में कृषि विधेयकों को लेकर किसानों में उबाल
पटियाला में शुक्रवार को कृषि विधेयकों के विरोध में किए बंद के आह्वान का व्यापक असर देखने को मिला। सभी बाजार व दुकानें बंद रहीं। उधर, केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा भी चरम पर रहा। नाभा में भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के बैनर तले किसानों ने बौडां गेट पुल नीचे शुक्रवार को दूसरे दिन भी रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पंजाबी कलाकार हरभजन मान, रणजीत बावा, तरसमे जस्सड़, हरजीत हरमन आदि भी किसानों के समर्थन को पहुंचे।

किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां, करनैल सिंह लंग, जसविंदर सिंह सोमा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि विधेयक किसानों व मजदूरों को तबाह कर देंगे। वहीं किसान जत्थेबंदियों ने पातड़ां में न्याल बाईपास चौक, समाना में गाजेवास गांव के नजदीक भवानीगढ़ रोड और पटियाला-सरहिंद रोड पर गांव फग्गनमाजरा नजदीक सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। मुलाजिमों, मजदूरों ने बाजारों से रोष मार्च भी निकाला।

पटियाला: किसानों के समर्थन में आए बिजली मुलाजिम
किसान हमारे भाई हैं, इसलिए किसी भी कीमत पर इन खेती कानूनों को लागू नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि अगर काले कानून आ गए, तो किसान व खेती सेक्टर पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। यह कहना था विभिन्न बिजली मुलाजिम जत्थेबंदियों के नुमाइंदों का। पीएसईबी इंप्लाइज ज्वाइंट फोरम के बैनर तले शुक्रवार को विभिन्न बिजली मुलाजिम जत्थेबंदियों ने किसानों के समर्थन में प्रदेश भर में बिजली निगमों के उप मंडल व मंडल दफ्तरों के आगे रोष रैलियां कीं। पटियाला में भी बिजली मुलाजिमों ने प्रदर्शन किया।

ज्वाइंट फोरम के प्रदेश स्तर के नेताओं कर्मचंद भारद्वाज, कुलदीप सिंह खन्ना, जगरूप सिंह महिमदपुर, हरपाल सिंह ने कहा कि इन विधेयकों से गांवों के विकास रुक जाएंगे। इसलिए किसानों के समर्थन में सभी मजदूरों व मुलाजिम जत्थेबंदियों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि बिजली संशोधन बिल 2020 के लागू होने से भी पंजाब के किसानों को मिलती मुफ्त बिजली की सुविधा छीन ली जाएगी। इसलिए वह इस बिल का भी विरोध करते हैं।

राजपुरा : बंद के समर्थन में धरने पर बैठे किसान
पंजाब बंद की कॉल पर राजपुरा पूरी तरह से बंद रहा। किसान जत्थेबंदियों ने शम्भू बार्डर पर टोल बैरियर के नजदीक और राजपुरा अमृतसर नेशनल हाईवे पर सरहिंद बाईपास के नजदीक धरना देकर मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन के मौके पर कांग्रेस विधायक राजपुरा हरदियाल सिंह कम्बोज, जिला कांग्रेस प्रधान जिला यूथ प्रधान निर्भय सिंह मिल्टी, उप प्रधान गगनदीप सिंह जलालपुर सहित अन्य कई कांग्रेसी नेताओं ने किसानों के हक में खड़े होने का वादा किया वहीं आम आदमी पार्टी की पंजाब कोषाध्यक्ष नीना मित्तल, सीनियर नेता आशुतोष जोशी, दिनेश मेहता, बंत सिंह ने किसानों को समर्थन देने का भरोसा दिलाया।

वहीं अकाली दल बादल की ओर से गगन चौक पर धरना दिया गया। इसमें जत्थेदार सुरजीत सिंह गढ़ी, अकाली दल व्यापार विंग पंजाब के महासचिव महिंदर पप्पू, शहरी अकालीदल सर्कल प्रधान रणजीत राणा, महासचिव जसविन्द्र जैलदार समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

पंजाब बंद के कारण जरूरी चीजों की सप्लाई प्रभावित, लोग परेशान
खेती विधेयकों के विरोध में पंजाब बंद के कारण सूबे में जरूरी चीजों की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हुई। सब्जी और फल मार्केट बंद होने के कारण बाहर से कोई सप्लाई नहीं हो सकी। दोधी यूनियन की तरफ से भी बंद का समर्थन करते हुए काम बंद रखा गया, जिस कारण दूध की सप्लाई भी प्रभावित हुई, जबकि हाईवे जाम होने के कारण बाहर से भी दूध नहीं पहुंचा।

अबोहर: अकालियों ने दिया बाईपास पर धरना
मलोट रोड बाईपास पर शुक्रवार को अकाली दल बादल ने कृषि अध्यादेशों के खिलाफ धरना दिया। हल्का बल्लूआना के पूर्व विधायक प्रकाश सिंह भट्टी ने कहा कि पूरे देश के लोगों का पेट भरने की क्षमता रखने वाले पंजाब के किसानों का अस्तित्व खतरे में है। अध्यादेशों के विरोध में सांसद हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्री पद से त्यागपत्र देकर किसानों की लड़ाई में शामिल हुई हैं।

भट्टी ने कहा कि केंद्र सरकार का दावा है कि अब किसान अपनी उपज को खेत-खलिहान या देश के किसी भी शहर में बेच सकेगा। लेकिन ऐसा करके सरकार मंडी की व्यवस्था को खत्म कर रही है। बड़ा व्यापारी वर्ग किसानों को दोनों हाथों लूटने के लिए स्वतंत्र होगा। उन्होंने कहा केंद्र सरकार मोदी का यह कदम देश को फिर से गुलामी की ओर धकेलना वाला साबित होगा।

किसान संगठनों ने किया चक्का जाम, बंद रहे बाजार
कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को भारत बंद का शहर में पूरा असर देखने को मिला, जिसके चलते शहर के सभी प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहे। सभी वर्गों ने अपनी-अपनी दुकानें व कारोबार बंद रख किसानों के हक में आवाज बुलंद की। शहर में केवल पेट्रोल पंप, शराब के ठेके व बैंक और सरकारी कार्यालय ही खुले रहे, जबकि अन्य सभी प्रकार के प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहे। इधर कृषि विधेयकों का विरोध करने वाले किसान संगठनों ने शहर के चारों ओर मुख्य मार्गों पर धरना लगाया। जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मोगा में सूना पड़ा बाजार।

हनुमानगढ़ रोड राजपुरा के पास लगाए धरने में भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान सुभाष गोदारा, भारतीय किसान एकता उगराहां के विनोद डूडी तथा भाकियू सिद्धपुर के प्रगट सिंह ने कृषि विधेयकों को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की। इस मौके पर किसान नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक चले इस धरने में सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।

 

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