
बिलासपुर। सरकारी उदासीनता कहें या फिर दोष किस्मत को दें। स्टेट वेलफेयर बोर्ड के अधीन कार्यरत बाल सेविकाओं (कम क्राफ्ट टीचर) को 37 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा। लगभग तीन साल से वेतन न मिलने के कारण इन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अपने हुनर से महिलाओं और युवतियों को स्वरोजगार के लिए सशक्त बनाने वाली यह महिला कर्मी खुद लाचार हैं। इन्हें वर्ष 2009 के बाद का वेतन अभी तक नहीं मिला। वहीं, 1996 के पे स्केल का एरियर भी बकाया है।
महिला सशक्तिकरण का नारा बुलंद करने वाली हिमाचल सरकार में महिलाओं के साथ ही अनदेखी हो रही है। सभी विभागों के कर्मचारी 1966, 1986, 1996 और 2006 के संशोधित वेतनमान लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। लेकिन, इन बाल सेविकाओं को अभी भी 1996 का वेतनमान दिया जा रहा है। इसका बकाया एरियर अभी तक नहीं मिला।
बाल सेविकाओं के मुताबिक बाल सेविका कम क्राफ्ट टीचर लड़कियों और औरतों को स्वरोजगार के लिए तैयार करती हैं। कई बार किराया तक भी जेब से खर्च करना पड़ता है लेकिन वेतन नहीं मिलने से उन्हें दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। कई विधवा बाल सेविकाओं को अपने बच्चों की परवरिश करनी मुश्किल हो गया है। लिहाजा, सरकार को इस बारे सोचने की जरूरत है। संघ की बाल सेविका कम क्राफ्ट टीचर संघ की प्रधान गीता, जिला सचिव निर्मला, सुषमा ने बताया कि कई बार वह इस बारे में सरकार से गुहार लगा चुके हैं, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय सूत्रों के अनुसार सरकार ने अभी तक इसके लिए बजट का प्रावधान नहीं किया है। हालांकि, पूर्व कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2007 में इन अध्यापिकाओं को समाज कल्याण विभाग में समायोजित करने की योजना बनाई थी, मगर ऐसा हुआ नहीं। अब फिर बाल सेविकाएं इसकी मांग उठाने लगी है। उधर, वेलफेयर बोर्ड के सचिव बीसी नेगी ने कहा कि उन्होंने हाल ही में ज्वाइन किया है। जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।
