
चंडीगढ़
केंद्र सरकार द्वारा पारित किए किसान विरोधी अध्यादेशों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का पूरा समर्थन करते हुए, भाजपा को छोड़कर पंजाब की प्रमुख सियासी पार्टियों ने बुधवार को प्रस्ताव पास किया कि लोकहित में केंद्र इसे वापस ले और न्यूनतम समर्थन मूल्य से छेड़छाड़ न की जाए।
सर्वदलीय बैठक में भाजपा ने जहां इस प्रस्ताव का विरोध किया वहीं शिरोमणि अकाली दल ने पहले तो इस पर अपनी आशंका जाहिर की, लेकिन बाद में इस प्रस्ताव पर दूसरी पार्टियों के साथ खड़े होते हुए इस बात पर आंशिक सहमति दी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मौजूदा समय में की जा रही गारंटीशुदा खरीद और सूबे के एपीएमसी से किसी कीमत पर छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। शिअद ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से प्रतिनिधिमंडल के रूप में मिलने के फैसले का भी समर्थन किया गया।
लोकहित में इसे वापस लेने की अपील की जाएगी
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सभी सियासी पार्टियों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से मिलकर इस किसान विरोधी कानून से उत्पन्न आशंकाओं की जानकारी देगा और यह अपील करेगा कि लोकहित में इसे वापस लिया जाए। कहा गया कि कृषि और मंडीकरण सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं और मौजूदा अध्यादेश संविधान में दर्ज सहकारी संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।
इसके अनुसार केंद्र सरकार से अपील की जाएगी कि इन अध्यादेशों की तुरंत समीक्षा करके इन्हें वापस लिया जाए। हालांकि शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि उनकी पार्टी अध्यादेशों को सहकारी संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ बताने से पहले कानूनी राय की मांग करेगी। मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई वीडियो कांफ्रेंस मीटिंग पांच घंटे चली।
कृषि के मसले पर केंद्र को दखल देने का हक नहीं: कैप्टन
कैप्टन ने कहा कि कृषि मसले पर केंद्र सरकार को दखल देने का हक नहीं है। उन्होंने सभी पार्टियों को प्रदेश और यहां के लोगों के हित में इस मुद्दे पर उनकी सरकार के साथ खड़े होने की अपील की। कैप्टन ने इस मसले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही केंद्र द्वारा यह अध्यादेश जारी किए जाने का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने सुखबीर बादल से अपील की कि अपने दिल की आवाज सुनें और सियासत अपने फैसले पर भारी न पड़ने दें। मीटिंग शुरू होने से पहले सभी पार्टियों के नेताओं ने चीनी सरहद पर गलवां घाटी में झड़प के दौरान शहीद हुए 20 बहादुर सैनिकों की याद में 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
अध्यादेश संघीय ढांचे की भावना का उल्लंघन : जाखड़
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि अध्यादेश इसकी शब्दावली और सरकार के इरादे दोनों के हिसाब से सहकारी संघीय ढांचे की भावना का उल्लंघन करता है। उन्होंने अध्यादेशों के समय को लेकर भी सवाल उठाया, जोकि ऐसे समय लाए गए हैं जब देश कोविड संकट और चीन द्वारा पेश की गई चुनौती का सामना कर रहा है और आर्थिक हालात डांवाडोल हैं।
भाजपा ने अध्यादेशों को किसान पक्षीय बताया
भाजपा के प्रदेश प्रधान अश्विनी शर्मा ने इन अध्यादेशों को किसान पक्षीय बताते हुए एमएसपी को खत्म करने के कदम से इंकार किया। उन्होंने दावा किया कि एमएसपी स्थायी है। केंद्र सरकार का मंडीकरण को खत्म करने का कोई भी विचार नहीं है। शर्मा ने कहा कि आजादी के 73 वर्षों बाद मोदी सरकार ने किसानों को आजादी प्रदान की है।
आम आदमी पार्टी ने किया अध्यादेशों का विरोध
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रधान और लोकसभा सांसद भगवंत मान ने कहा कि इन अध्यादेशों से न सिर्फ किसान बल्कि आढ़ती और छोटे व्यापारी भी प्रभावित होंगे। यह अध्यादेश लाने में अपनाई गई तेजी पर सवाल उठाते हुए मान ने कहा कि इस संबंधी संसद में विस्तार से बहस होनी चाहिए थी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरिंदर सिंह तोमर द्वारा एमएसपी को बहाल रखने का एलान किए जाने के तीन दिन बाद ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एमएसपी को देश पर बड़ा बोझ करार दिया।
सीपीआई के प्रदेश सचिव बंत सिंह बराड़ ने ऐसे समय पर अध्यादेश लाने की जरूरत पर सवाल उठाया, जब पूरी तरह सफल हो चुकी मंडीकरण प्रणाली और ढांचा काम कर रहा है। प्रदेश सरकार को अपना समर्थन देते हुए सीपीआई (एम) के प्रदेश सचिव कामरेड सुखविंदर सिंह सेखों ने कहा कि अगर एमएसपी रहता भी है तो मंडियों और एफसीआई के बिना इसका किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश प्रधान जसवीर सिंह गड़ी ने इन अध्यादेशों को पूरी तरह किसान विरोधी बताया।
अकाली दल ने अपनी स्थिति स्पष्ट की
सर्वदलीय बैठक के बाद शिअद ने एक बयान जारी कर सर्वदलीय बैठक में अपनी भूमिका पर स्थिति स्पष्ट की। पार्टी की तरफ से कहा गया कि कृषि और मंडीकरण राज्यों का विषय है और केंद्र इसका उल्लंघन कर रहा है। इस संबंध में पार्टी संविधान विशेषज्ञों की राय लेगी। अगर संविधान विशेषज्ञों ने कहा कि केंद्र उल्लंघन कर रहा है तो पार्टी अन्य दलों के साथ खड़ी होगी और केंद्र से इस विषय पर बात की जाएगी।
