

- सैंपल देने के लिए पहले नोटिस के बाद भी ब्यूरो नहीं पहुंचे थे तीनों आरोपी
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सूत्रों का कहना है कि अगर इस मियाद के दौरान आरोपी सैंपल नहीं देते हैं तो विजिलेंस जांच में सहयोग न करने का हवाला देते हुए उनकी गिरफ्तारी को लेकर कवायद शुरू कर सकती है। दरअसल, प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त व पूर्व मुख्य सचिव पार्थ सारथी मित्रा के प्रमुख सचिव राजस्व रहने के दौरान बड़ी संख्या में गैर कृषकों को हिमाचल में जमीन खरीदने के लिए धारा-118 की मंजूरी दी गई।
आरोप है कि इस दौरान जमकर भ्रष्टाचार हुआ। पांच से दस लाख रुपये तक घूस ली गई। अकेले 2010 में ही राजस्व विभाग ने ढाई सौ से ज्यादा मामलों में 118 के तहत अनुमति दे दी। भ्रष्टाचार की जांच कर रही विजिलेंस मामले में मित्रा समेत कई लोगों से घंटों पूछताछ कर चुकी है। मामले में ब्यूरो ने पांच आरोपियों को वायस सैंपल देने के लिए कहा था, जिसमें से सिर्फ दो नहीं सैंपल दिए। चूंकि ब्यूरो को कोर्ट वॉयस सैंपल लेने की अनुमति दे चुका है।
ऐसे में सभी आरोपियों को सैंपल देना पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि सभी आरोपियों के सैंपल विजिलेंस के लिए इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि इन सभी के सैंपल को फोन रिकॉर्डिंग में दर्ज आवाजों से मिलान कर केस को मजबूत किया जा सके। माना जा रहा है कि इस कथित रिकॉर्डिंग में ही पार्थ सारथी मित्रा से बातचीत की आवाज दर्ज है। अगर आवाज का मिलान हुआ तो मित्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
