ज्वालामाई की आग बुझा कर ‌मंदिर को बनाया खंडहर

आपको ये सुनकर हैरानी जरूर होगी लेकिन ऐसी मान्यता है कि हिमाचल के कांगड़ा स्थित मां ज्वाला से भी बड़ी एक और ज्वालामाई थी। इसकी लपटें कहीं बड़ी और ताकतवर थी। कई किताबों में भी इसका उल्‍लेख किया गया है।

कई लोग इसे हिमाचल के कांगड़ा स्थित मां ज्वालाजी की बड़ी बहन या बड़ी ज्वालामाई कहा करते थे। यहां भी काफी संख्या में श्रद्घालु पहुंचते थे। लोगों की आस्‍था काफी गहरी थी। हिमाचल की ज्वालाजी के बारे में कहा जाता है कि अकबर ने खुद ब खुद लगातार जलने वाली मां की ज्वाला को बुझाने का प्रयास किया था।

उसने लोहे के सात बड़े तवों से यहां आग की लपटों को बुझाने की कोशिश की थी। मगर वह नाकाम रहा था। आखिरकार उसने सोने का छत्र मां को समर्पित किया और खुद भी मां के चमत्कार को मानने लगा था। मगर दूसरी ज्वालामाई के साथ कुछ और ही हुआ।

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