
बद्दी (सोलन)। हिमाचल प्रदेश गत्ता उद्योग संघ की बैठक में गत्ता उद्योग पर छा रहे संकट पर चिंता जताई। वक्ताओं का कहना था कि अगर प्रदेश व केंद्र सरकार ने गत्ता उद्योग के उत्थान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में प्रदेश से गत्ता उद्योग का नामोनिशान मिट जाएगा।
बद्दी में प्रदेश अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कई वर्षों उद्योग में लगने वाले कच्चे माल के रेट तो बढ़ रहे हैं लेकिन तैयार माल के रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। जिससे प्रतिस्पर्धा के इस दौर में उद्योग को टिके रहना घाटे का सौदा बना हुआ है। प्रदेश में दो सौ से अधिक गत्ता उद्योग हैं। यहां के उद्योगों की खपत पचास हजार टन प्रति माह है लेकिन प्रदेश में जो पेपर मिल लगे हुए हैं वे मात्र 8 हजार टन ही सप्लाई दे पा रहे हैं। शेष सप्लाई उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य बाहरी राज्यों से मंगानी पड़ रही है।
वहीं बैठक में सरकार से रेगुलेटिरी अथारिटी बनाने की मांग उठाई गई, जिससे अचानक रेट बढ़ने से पेपर के रेट पर चेक आउट हो सके। शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा से मिलेगा तथा गत्ता उद्योग के समक्ष आने वाली इस समस्या से अवगत कराएगा। बैठक में प्रदेश महासचिव अजय चौधरी, भारत भूषण जैन, गिरीश सरदाना, गगन कपूर, निर्मल सिंगला, देेवेंद्र सहगल, राजीव बंसल, अनिरुद्ध अग्रवाल, आदित्य सूद, मनीष गर्ग, बलदेव गोयल, अनिल गोयल और राजीव गुलाटी समेत दर्जनों उद्यमियों ने भाग लिया।
