

उन परिजनों के सब्र का बांध टूट चुका है जो तीन दिन से मलबे में दफन हुए अपने परिवार के जिंदा होने की आस लगाए बैठे हैं। शुक्रवार की शाम पांच बजे तक मलबे से 64 शव निकाले गए, जिसमें 26 पुरुष, 28 महिला और 10 बच्चे शामिल हैं।
मलबे में दफन हुए मालिण गांव में मलबा हटाने के लिए पोकलेन के साथ अब बुलडोजर भी लगाया गया है। मगर चारों ओर दुर्गंध पसर गई है। इसके मद्देनजर लाशों को जलाने का भी काम शुरू किया गया है।
पुणे के अतिरिक्त जिलाधिकारी गणेश पाटिल ने बताया कि एनडीआरएफ ने खोजी कुत्तों की सहायता से मलबे में दबे लोगों को निकालने का कार्य तेज कर दिया है।
एनडीआरएफ को आशंका है कि बारिश के चलते मालिण गांव की छोटी नदी में भी कुछ शव बह सकते हैं, इसलिए जाल बिछा दिया गया है और निगरानी के लिए दो बोट भी नदी में उतारी गई हैं।
महाराष्ट्र सरकार देगी 5 लाख की मदद

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि आर्थिक मदद के साथ ही सरकार इस दुर्घटना में घायलों का मुफ्त उपचार और पूरे गांव का पुनर्वास भी करेगी।
कुदरत के कहर से नेस्तनाबूद हो चुके मालिण गांव में जीवित बचे लोगों और मृतकों के परिजनों की सहायता के लिए मुंबई के डिब्बावाले चिट्ठी अभियान चलाएंगे। मुंबई में डिब्बावाले प्रतिदिन करीब दो लाख ग्राहकों को खाने का डिब्बा पहुंचाते हैं, लेकिन अब डिब्बे के साथ चिट्ठी देकर मालिण गांव की मदद का आह्वान करेंगे।
