किसका खून हुआ अब आपको नहीं लगेगा पता

शिमला। आपके शहर में कत्ल हुआ.. किसका हुआ और कौन है आरोपी? यह जानने के लिए आपको आरोपी की सजा निर्धारित होने तक इंतजार करना होगा। इतना ही नहीं छोटे से छोटे अपराध में भी शिकायतकर्ता और आरोपी का नाम अब सार्वजनिक नहीं होगा। किसके घर चोरी हुई उसका नाम भी छिपा दिया जाएगा। अगर किसी की गाड़ी भी चोरी होती है तो वह भी पब्लिक के सामने नहीं लाया जाएगा। जिस थाना क्षेत्र में वारदात हुई है केवल वही जानकारियां सार्वजनिक होंगी, लेकिन इसमें न ही आरोपी और न ही शिकायतकर्ता के नाम का कहीं उल्लेख होगा। अदालत से जब सजा होगी तभी नामों का खुलासा पुलिस करेगी।
थाने में दर्ज होने वाली एफआईआर एक सार्वजनिक दस्तावेज है। इसमें शिकायतकर्ता और जिस पर आरोप लगे हैं उनके नामों का उल्लेख रहता है। मामला कत्ल का हो, गबन का हो या फिर दुराचार का। नाम अब से पहले सार्वजनिक होते रहे हैं। अब छोटे से छोटे मामले में भी नाम पब्लिक के सामने नहीं लाए जाएंगे। मीडिया को भी इसकी जानकारी नहीं दी जाएगी। कहीं सड़क हादसा हो गया। हादसे में कितने लोगों ने दम तोड़ा और कितने घायल हुए। इनके नाम नहीं बताए जाएंगे। इतनी सूचना दी जाएगी कि कितने घायल और कितने मरे हैं। गाड़ी चोरी हुई है तो ये जानकारी मुहैया होगी कि कार चोरी हुई है। किसकी हुई है और किस जगह से हुई है यह जानकारी नदारद कर दी जाएगी। अगर किसी का कत्ल हो जाता है तो यह बात सार्वजनिक होगी एक महिला या पुरुष का कत्ल हुआ है। यह कौन था और कहां का रहने वाला था इसकी जानकारी पुलिस नहीं देगी। आरोपी कौन है इसके बारे में भी कोई नहीं बताएगा। केवल इतना होगा पुरुष का कत्ल हुआ और एक आरोपी ने किया। जनता को यह जानने के लिए सालों इंतजार करना होगा कि कत्ल किसका और किसने किया, वह भी तब, जब अदालत से आरोपी को सजा हो जाएगी। शिमला पुलिस ने इस नियम पर काम करना शुरू कर दिया है।

प्रदेश मुख्यालय से आए निर्देश : एसपी
पुलिस अधीक्षक अभिषेक दुल्लर ने कहा कि प्रदेश मुख्यालय से निर्देश आए हैं कि शिकायतकर्ता और आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाए। इसलिए नाम नहीं बताए जा रहे हैं।

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