
रिवालसर (मंडी)। तीन धर्मों की नगरी रिवालसर की पवित्र झील में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है। शनिवार को झील में सैकड़ों मछलियां मौत के मुंह में समा गई। एक सप्ताह पहले मछलियों की सैकड़ों की तादाद में मौत पर मत्स्य विभाग के उपनिदेशक ने जायजा लिया था। बावजूद इसके मछलियाें के मरने का सिलसिला नहीं थमा।
प्रशासन मछलियाें की हो रही मौत पर अंकुश लगाने में नाकाम है। वहीं जिला प्रशासन भी कोई कारगर कदम अब तक नहीं उठा पाया है। झील में मछलियों के मरने की वजह सिल्ट, फिश फीड और मछलियों की तादाद में बढ़ोतरी होना बताया जा रहा है। लेकिन न तो झील से गंदगी को साफ किया है और न ही फिश फीड पर रोक लगी है। झील को प्रदूषण मुक्त बनाने और डिसिल्टिंग के प्रोजेक्ट फाइलाें तक ही सिमट कर रह गए हैं। झील में गंदगी की बढ़ रही मात्रा के पीछे सीवरेज भी एक वजह है। सीवरेज योजना के लिए ग्यारह करोड़ की राशि स्वीकृत है। शिलान्यास भी हो चुका है लेकिन सीवरेज योजना की डीपीआर दो साल बाद भी तैयार नहीं हो पाई है। इसके चलते सीवरेज का कार्य लटका पड़ा है। झील में टनों के हिसाब से मछलियां बेमौत मर रही हैं। नगर पंचायत रिवालसर के अध्यक्ष बंशी लाल ने कहा कि नगर पंचायत के पास संसाधनों की कमी है। इसके चलते झील को प्रदूषण मुक्त करने में समस्या आ रही है।
