गुड न्यूज! अब सिर्फ 5 मिनट में पहुंचें जाखू मंदिर

rope will run in Snowfall as well
हिल्सक्वीन शिमला का बहुप्रतीक्षित जाखू रोप-वे छह माह के भीतर तैयार हो जाएगा। अगले साल जनवरी माह में स्थानीय लोग और सैलानी स्विस तकनीक से बनने वाले रोप-वे के जरिये शहर की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित जाखू मंदिर पहुंच सकेंगे।

बर्फ गिरने पर भी रोप-वे की मदद से लोग अब आसानी से जाखू पहुंच सकेंगे। रोप-वे के माध्यम से सर्दियों में बर्फ से सराबोर हिल्सक्वीन का नजारा भी देखने को मिलेगा।

रोप-वे का संचालन शुरू होने के बाद रिज मैदान से जाखू मंदिर पहुंचने में सिर्फ पांच मिनट का समय लगेगा।

निर्माण के बाद पर्यटन विभाग संभालेगा जिम्मा

hp tourism department will run rope way in shimla
रोप-वे का निर्माण कर रही कंपनी के कमर्शियल मैनेजर केके हलदार ने बताया कि रोप-वे मोनो केबल जिगबैक सिस्टम पर चलाया जाएगा। इसके लिए वायर और केबिन विशेषतौर पर स्विट्जरलैंड से मंगवाए गए हैं।

बीओटी के तहत बन रहे जाखू रोप वे का संचालन निर्माण कर रही कंपनी 40 साल तक करेगी। इसके बाद कंपनी रोप-वे को पर्यटन विभाग के सुपुर्द कर देगी।

रोपवे के बनने से जहां लोगों को जाखू मंदिर की चढ़ाई नहीं चढ़नी पड़ेगी। वहीं, शिमला में सैलानी भी ज्यादा संख्या में आकर्षित होंगे। इसका सीधा फायदा पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को होगा।

रोप-वे में होगी ये सारी सुविधाएं

there will be many facilities in rope way
जाखू रोप-वे में आठ केबिन होंगे। चार केबिन जोधा निवास से लोगों को जाखू लेकर जाएंगे और चार केबिन जाखू से जोधा निवास की ओर चलेंगे। जोधा निवास स्थित लोअर टर्मिनल और जाखू स्थित अपर टर्मिनल में रेस्टोरेंट भी बनाए जाएंगे। रेस्टोरेंटों में खाने पीने की सभी वस्तुएं मुहैया करवाई जाएंगी।

रोप-वे के केबिन पारदर्शी होंगे। रोप-वे में सफर के दौरान यात्री सिटी व्यू का आनंद ले सकेंगे। एक समय में केबिन के भीतर छह लोग बैठ सकेंगे और राजधानी शिमला की वादियों को निहार सकेंगे।

जोधा निवास में बनाए गए लोअर टर्मिनल के टॉप फ्लोर से यात्री रोप-वे केबिन में सवार होंगे। चार लिफ्टों के माध्यम से यात्रियों को टॉप फ्लोर तक पहुंचाया जाएगा। रोप-वे में यात्रियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे। यदि केबिन अटक जाते हैं तो इंडीपेनडेंट रेस्क्यू सिस्टम के जरिये यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा जाएगा।

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