
शिमला। हिमाचल सरकार की ओर से वृद्ध आश्रम बनाने के लिए डेढ़ बीघा जमीन न देने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने जन कल्याण संस्था रामपुर बुशहर के पत्र पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव राजस्व, जिलाधीश शिमला और निदेशक कल्याण विभाग को आदेश दिए हैं कि वे इस मामले में तीन माह के भीतर वांछित कार्रवाई करें और इस बारे शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को अवगत करवाएं।
प्रार्थी संस्था ने हाईकोर्ट को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी राज्य सरकार वृद्ध आश्रम बनाने के लिए लीज पर जमीन देने के लिए पिछले 17 वर्षों से मामले को लटका रही है। आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से बाहरी राज्यों की कंपनियों के लिए कई बीघा जमीन लीज पर दी जाती है, परंतु अपने राज्य के बेसहारा वृद्धों के लिए डेढ़ बीघा जमीन नहीं दी जा रही है। मामले की आगामी सुनवाई 31 मई को निर्धारित की गई है।
