
बिलासपुर। प्रदेश से क्या औद्योगिक घराने रूठ गए हैं या राज्य सरकार की नीतियां उद्योगपतियों को रास नहीं आ रही? हिमाचल में घटते उद्योग इसी ओर इशारा कर रहे हैं। राज्य में ‘सत्ता’ किसी भी दल की रही हो, लेकिन उद्योग बढ़ाने को खास कदम नहीं उठाए गए। औद्योगिक पैकेज का मसला अभी तक केंद्र में लटका हुआ है। इस मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप के अलावा कोई खास नहीं कर पाई। सेंट्रल कैपिटल सब्सिडी का हाल ही में केंद्र ने ऐलान किया है। जानकार कहते हैं कि महज 15 प्रतिशत रकम होने से इसका भी खास फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है।
उद्योग विभाग के आंकड़ों को लें तो हर साल राज्य में पंजीकृत होने वाले उद्योगों का आंकड़ा सिकुड़ता गया। सब्सिडी नाममात्र होना इसकी वजह बताया जा रहा है। औद्योगिक पैकेज का न मिलना भी नए उद्योग लगने में बड़ी बाधा है। राज्य सरकार द्वारा सिर्फ रिवर्ज कोटे के तहत एससी और एसटी से संबंधित लोगों को ही सब्सिडी दी जा रही है। बाहरी राज्य के बडे़ उद्योगपति भी यहां दिलचस्पी नहीं दे रहे। वहीं ट्रांसपोर्ट की दिक्कत एवं रेलवे विस्तार नहीं होना भी इसकी बड़ी खामी माना जा रहा है।
बॉक्स के लिए—
1. राज्य में पंजीकृत लघु उद्योग
वर्ष यूनिट संख्या निवेश रोजगार
2011-12 856 61909 7732
2012-13 798 96331 9298
2. राज्य में पंजीकृत मध्यम एवं बडे़ उद्योग
वर्ष यूनिट संख्या निवेश रोजगार
2011-12 16 187929 2981
2012-13 7 21168.97 339
कोड्स—
1. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिमाचल के लिए औद्योगिक पैकेज दिया था। भेदभाव करते हुए इसे कांग्रेस ने बंद किया। इसके अलावा रेलवे विस्तार आदि नहीं होने से भी उद्योग घट रहे हैं। -सुरेश चंदेल, पूर्व सांसद
2. केंद्र ने सेट्रल सब्सिडी की घोषणा से फायदा हुआ है। इससे पहले हालांकि यहां आने वाले उद्योगपतियों की संख्या कम थी। लेकिन, अब यह बढ़ने लगी है। -राजेश धर्माणी, सीपीएस एव विधायक घुमारवीं।
