कलाकारों के चयन पर सवाल

रोहड़ू। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कलाकारों ने के चयन पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि कई माह से मेले के नाम पर चंदे के रूप में जुटाए लाखों रुपये सिफारिशी कलाकारों को कार्यक्रम देने के लिए लुटाए जाते हैं। संगीत की जानकारी से दूर कार्यक्रम देने के लिए मंच पर खड़े बेसुरे कलाकार क्षेत्र सांस्कृतिक पहचान को खतरा पैदा कर रहे हैं।
रोहड़ू के राज्य स्तरीय मेले में लोक कलाकारों के नाम पर लाखों रुपये बहाए जाते हैं, लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्तर हर साल गिर रहा है। 28 साल से मंच का संचालन कर रहे राजकुमार इसके गवाह हैं। कलाकारों को मेले में शामिल करने के लिए प्रदेश के कैबिनेट मंत्री से लेकर विधायकों की सिफारिश होती है। प्रदेश के आईएएस, एचएएस अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक से कलाकारों के लिए मंच मांगने का सिलसिला चलता है। कलाकार के स्तर और उसके संगीत की सिफारिश करने वालों को शायद जानकारी नहीं रहती। तीन दिन तक मेले में कार्यक्रम पेश करने वाले प्रदेश की संस्कृति को तार-तार कर रहे हैं। राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंच संचालक राजकुमार विलुप्त हो रही लोक संस्कृति से आहत हैं। वे कहते हैं कि 1986 से रोहड़ू मेले में मंच संचालन कर रहे हैं। पहले मेेले में सात आठ कलाकार रात दो बजे तक लोगों का मनोरंजन करते थे। उसके बाद कार्यक्रम का समय बारह बजे हुआ तो कलाकार बढ़ते गए। अब समय रात दस बजे तक कार्यक्रम देने वाले कलाकारों की संख्या तीस से चालीस पहुंच चुकी है। वे कहते हैं कि कोई तो प्रदेश की लोक संस्कृति को बचाने में आगे आओ।
मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं एसडीएम वाईपीएस वर्मा का कहना है कि कलाकारों की सिफारिश जरूर पहुंचती है, लेकिन कलाकारों का चयन कल्चर कमेटी करती है। कलाकारों को मिलने वाले मानदेय भी कमेटी तय करती है।

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