आखिर ठेकेदारों पर इतनी मेहरबान क्यों है पुलिस

चंबा। तीन बार लिखित शिकायत करने के बाद भी होली में पत्रकार पर जानलेवा हमला करने केे आरोपी ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। लिखित शिकायत करने के बाद भी आरोपी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है। पुलिस मेडिकल रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है और रिपोर्ट आने पर ही कार्रवाई करने की बात कह रही है। 14 अप्रैल को ‘अमर उजाला’ के प्रतिनिधि दलीपा राम का होली में कुछ ठेकेदारों ने रास्ता रोककर जातिसूचक शब्द कहे थे और पहले से दी गई जान से मारने की धमकी के तहत जानलेवा हमला किया था। उस दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों व महिलाओं के चलते वह ठेकेदार के चुंगल से बच पाया था और इस हमले में पत्रकार को अंदरूनी चोटें आई थीं। होली आंदोलन की कवरेज को रोकने और सच को सामने लाने के कारण ठेकेदारों ने पत्रकार पर जानलेवा हमला किया था। दो बार पुलिस चौकी होली में 25 मार्च और पांच अप्रैल को ठेकेदारों के खिलाफ लिखित शिकायत की जा चुकी है। इसके बाद 14 अप्रैल को भरमौर थाना में लिखित शिकायत की गई है। भरमौर से पत्रकार को मेडिकल के लिए चंबा भेजा गया था और चंबा अस्पताल में दो दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के छुट्टी पर होने के चलते एक्स-रे और मेडिकल जांच नहीं हो पाई है।
उधर, चिकित्सा अधीक्षक डा. विनोद शर्मा ने बताया कि चिकित्सक जरूरी कार्य के चलते छुट्टी पर गए थे। वीरवार तक चिकित्सक अस्पताल में पहुंच जाएंगे।

एएसपी से न्याय मांगा
आरोपी ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर दलीपा राम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुलवंत सिंह को बुधवार को एक शिकायत पत्र सौंपा और पुलिस से आरोपी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। शिकायत पत्र के माध्यम से बताया कि आरोपी ठेकेदार ने जातिसूचक शब्द कहे हैं और जानलेवा हमला किया है। उसे जल्द से जल्द इंसाफ दिलाया जाए।

कार्रवाई की जाएगी : एएसपी
एएसपी कुलवंत सिंह ने कहा कि मामले की पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। दलीपा राम को भरमौर से मेडिकल जांच के लिए चंबा भेजा गया। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही एफआईआर दर्ज करके मामले के संबंध में कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ
चंबा। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं अधिवक्ता जय सिंह ने बताया कि मारपीट या जानलेवा हमले के मामले में पुलिस पहले एफआईआर दर्ज करती है और एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित का मेडिकल करवाया जाता है। डाक्टर की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा लगाई जाती है। होली में पत्रकार पर हुए हमले के मामले में ही अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और एफआईआर की कापी भी मुहैया नहीं करवाई गई है।

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