
धर्मशाला। धर्मशाला के पास सौकणी दा कोट पंचायत के खड़ौता गांव के लोगों ने सड़क सुविधा न मिलने पर लोकसभा चुनाव के बहिष्कार की बात कही है। इनका कहना है कि छह दशक बीतने के बाद भी खड़ौता गांव में जीवन रेखा कही जाने वाली सड़क नहीं पहुंची है। दस वर्ष पहले तीन किलोमीटर सड़क का निर्माण तो किया गया, लेकिन एक हजार आबादी वाले गांव को सड़क नहीं मिली। गांववासियों और जनप्रतिनिधियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि हर सरकार ने आज तक गांववासियों के साथ धोखा किया है। गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो पालकी पर उठाकर ले जाना पड़ता है। गांववासियों को डिपो का राशन भी सिर पर उठाकर लाना पड़ता है। गैस सिलेंडर भी कंधे पर उठाकर ही लाना पड़ रहा है। आपातकाल में एंबुलेंस 108 भी गांव तक नहीं पहुंच पाती है। इस कारण एंबुलेंस सेवा का लाभ बाशिंदे नहीं उठा सकते हैं। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भार उठाकर पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। खनियारा खड़ौता सड़क दस साल से अधर में ही लटकी हुई है। सहयोग युवा मंडल खड़ौता के पूर्व प्रधान विजय कपूर, उपप्रधान राजकुमार, प्रधान जीवन कुमार, सचिव विकास कुमार, अनुराग, दीपराज, अभिषेक , अविनाश, रजिया मलिक, मोहम्मद रफी, विनय कुमार और करण कुमार तथा महिला मंडल की प्रधान सवित्रो देवी, सचिव तब्बू, रीना, अंजू देवी तथा गांव के बुजुुर्गों में चौकस राम, जगदीश कुमार, चरन दास, पूर्ण चंद, सिंहो राम आदि मतदाताओं ने अपने बच्चों के भविष्य के बारे में चिंता जताई है। इन्होंने इस बार चुनावी प्रक्रिया का बहिष्कार कर वोट न करने का ऐलान कर दिया है। लोगों का कहना है कि सड़क सुविधा की मांग हर मंच पर उठाते रहे, लेकिन आज तक सड़क अधर में ही है।
