जनसभा को दे देते हैं ग्राउंड, खिलाड़ियों पर रोक

धर्मशाला। कहने को खेल नगरी धर्मशाला, मगर यहां शहर के युवाओं को खेलने के लिए एक अदद मैदान की दरकार है। राजनीतिक जनसभाओं के लिए तो मैदान उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन यहां खेलने के नाम पर प्रतिबंध है। वैसे तो शहर में पुलिस मैदान और कॉलेज ग्राउंड दो खेल मैदान हैं, परंतु यहां पर खेलने की अनुमति नहीं है। पुलिस मैदान की बात करें तो वर्षों से पुलिस प्रशासन ने मैदान में खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। रहा कॉलेज ग्राउंड तो यह शिक्षण संस्थान की प्रापर्टी है, यहां भी प्रशासन खेलने की अनुमति नहीं देता। सुबह-शाम या दिन में शहर के युवाओं के लिए खेलने के लिए कोई भी मैदान नहीं है। जबकि, धर्मशाला को खेल नगरी के नाम से जाना जाता है। इसका कारण शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम और सिंथेटिक ट्रैक का होना है, लेकिन यह आम युवा वर्ग की पहुंच से दूर हैं। स्थिति यह है कि खेल नगरी कहलाने वाले धर्मशाला शहर में कोई खेल का मैदान ही नहीं है।

क्या कहता है युवा वर्ग
खेल मैदान न होने से शहर की युवा पीढ़ी में खासा रोष है, क्योंकि खेल नगरी कहलाने वाले उनके शहर में उन्हें खेलने के लिए कोई भी मैदान ही नहीं है।

शामनगर निवासी दीक्षित नरुला का कहना है कि नाम की खेल नगरी है। पहले पुलिस मैदान खुला होता था तो वहां खेल लिया करते थे, लेकिन प्रशासन द्वारा उसे बंद करने के बाद कोई भी मैदान बाकी नहीं बचा।

कचहरी निवासी गर्वित शर्मा का कहना है कि रैलियों के लिए पुलिस मैदान खोल दिया जाता है, लेकिन युवाओं के खेलने के लिए मैदान नहीं खोला जाता। प्रशासन की कार्यप्रणाली भेदभावपूर्ण है।

कोतवाली बाजार के सत्यम गौड़ का कहना है कि वह फुटबाल खेलते हैं, लेकिन अब मैदान में उतरे हुए उन्हें सात महीने हो गए हैं। खेल मैदान न होने से युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका नहीं मिल पा रहा।

स्थानीय निवासी गुरविंद्र सिंह का कहना है शहर में मैदान न होने से युवा वर्ग खेलकूद की बजाय नशे की लत में जा रहा है। खेल के शौकीन युवा भी घर में दुबक कर इंटरनेट और सोशल साइट के यूज तक सीमित रह गए हैं।

क्या कहते हैं शहर के नुमाइंदे
कोतवाली में बनेगा खेल मैदान : सुधीर
वर्तमान विधायक और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का कहना है कि रामलीला मैदान कोतवाली में खेल मैदान के निर्माण का प्रस्ताव डाला गया है। 35 लाख रुपये की लागत से खेल मैदान बनाया जाएगा। जबकि दाड़ी मैदान के लिए दस लाख स्वीकृत किए गए हैं। शहर में खेल मैदान जल्द ही तैयार होंगे।

वहीं पूर्व विधायक व मंत्री किशन कपूर का कहना है कि रामलीला मैदान तक सड़क उन्हीं ने पहुंचाई है। जबकि, रामनगर मैदान के लिए पैसा मंजूर किया। साथ ही कपूर का यह भी कहना है कि धर्मशाला शहर में वन भूमि अधिक होने के कारण खेल मैदान के लिए उपयुक्त जमीन नहीं है।

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