पार्क को विश्व धरोहर बनाने का विरोध

सैंज (कुल्लू)। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर बनाने का पार्क जोन में आने वाली तेरह पंचायतों ने विरोध किया है। इसी मुद्दे को लेकर जिला के दुर्गम गांव शाक्टी में पार्क के इक्को जोन के अंतर्गत आने वाले तेरह पंचायतों के लोगों व देवी देवताओं के कारदारों की बैठक कर आगामी रणनीति बनाई।
बैठक में लोगों ने कहा कि जब तक वनाधिकार बहाल व वनाधिकार कानून के तहत दर्ज नहीं होंगे तब तक पार्क को विश्व धरोहर बनाए जाने का विरोध किया जाता रहेगा। अगर लोगों के जंगलों से जुड़े हुए हकों को वनाधिकार कानून 2006 के तहत मान्यता नहीं दी गई, तो ऐसे में उन्हें विश्व धरोहर का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। हिमालय नीति अभियान के सचिव संदीप मिन्हास ने बताया कि बैठक में हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह, सचिव संदीप मिन्हास तथा सहारा के निदेशक राजेंद्र चौहान, जीएचएनपी प्रभावित और विस्थापित समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और सचिव जवाहर सिंह विशेष तौर पर उपस्थित थे।
बैठक में हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने कहा कि जब नेशनल पार्क बन रहा था तो उस समय लोगों के साथ जो वायदे किए गए थे, वह आज भी पूरे नहीं हुए हैं। लगभग 20 हजार परिवारों में से केवल 350 परिवारों को 43 हजार के करीब मुआवजा अधिकारों के बदले में मिला है। तीर्थन और सैंज सेंक्चुरी को जीएचएनपी में शामिल करने की एक तरफा प्रक्रिया गैर कानूनी है। नेशनल पार्क के दस किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र को इको सेंसटिव जोन घोषित कर दिया है। इससे और ज्यादा क्षेत्र के अन्य परंपरागत वन निवासी प्रभावित होंगे। वन अधिकार कानून 2006 बनने के बाद परंपरागत वनाधिकारों को समाप्त करने की प्रक्रिया नहीं चलाई जा सकती, जब तक इस कानून के तहत लोगों के वनाधिकारों को मान्यता दी जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है। बैठक में स्थानीय देवता आदि ब्रम्हा विशेष तौर पर शामिल हुए और देवता ने देव खेल में साफ तौर पर उद्घोषित किया कि कोई भी देवता इस इलाके में अपने देव स्थलों को छोड़कर अन्यत्र कहीं नहीं जाएंगे। बैठक में काफी संख्या में महिलाओं और पुरूषों ने भाग लिया। बैठक में स्थानीय लोगों ने कहा कि जब तक वनाधिकार बहाल व वनाधिकार कानून के तहत दर्ज नहीं होंगे तब तक पार्क को विश्व धरोहर बनाए जाने का विरोध किया जाता रहेगा।

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