होटल पवेलियन के पेड़ 30 साल पुराने

शिमला। एचपीसीए के होटल पवेलियन में मौजूद पेड़ों की उम्र 30 वर्ष या इससे अधिक है। यह खुलासा नौणी विवि के विशेषज्ञों की ओर से विजिलेंस को सौंपी गई रिपोर्ट में हुआ है। अगर विजिलेंस इस बात को साबित कर देती है कि पवेलियन के लिए पेड़ काटे गए हैं तो एचपीसीए की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विजिलेंस टीम फिलहाल अनुमान लगा रही है कि होटल बनाने के लिए 30 वर्ष और इससे अधिक की उम्र के बड़े पेड़ों को बिना अनुमति काटा गया। इन्हीं पेड़ों को काटने के खिलाफ विजिलेंस के धर्मशाला थाने में एचपीसीए पर तीसरी एफआईआर दर्ज है। हालांकि, होटल निर्माण स्थल पर कभी पेड़ थे, यह साबित करने के लिए विजिलेंस के पास अभी तक की जांच में ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं, जबकि मामले की जांच अंतिम चरण में है। डीआईजी अरविंद शारदा ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। क्या साक्ष्य मिले हैं, इस बारे में स्पष्ट नहीं किया जा सकता है।

पकड़ा गया है वन विभाग का झूठ
वन विभाग ने विजिलेंस को सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम के भीतर होटल पवेलियन निर्माण स्थल पर न पेड़ थे और न ही किसी तरह का पौधरोपण हुआ था। अभी तक की जांच में खुलासा हो चुका है कि 2009-10 में वन महोत्सव के दौरान पूर्व उद्योग मंत्री किशन कपूर ने पौधरोपण किया था। विजिलेंस के अनुसार सरकारी खर्चे पर हुए कार्यक्रम में 1500 से अधिक पौधे रोपे गए थे। हालांकि, पौधरोपण के बारे में तत्कालीन वन मंडल अधिकारी और रेंज ऑफिसर ने विजिलेंस को सौंपी रिपोर्ट में जिक्र तक नहीं किया है।

डीएफओ सहित कई जांच के दायरेे में
होटल पवेलियन के निर्माण के लिए जानबूझ कर तथ्य छुपाए गए। विजिलेंस के अनुसार एचपीसीए को फायदा देने के लिए तथ्यों को छुपाया गया। इसमें विजिलेंस ने पूर्व वन मंडल अधिकारी, रेंज ऑफिसर सहित राजस्व विभाग के कई संबंधित अधिकारी शामिल हैं। पद के दुरुपयोग और एचपीसीए को फायदा पहुंचाने वाले वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की मंजूरी को फाइल भेजने की तैयारी चल रही है।

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